भारत समेत पूरी दुनिया ने कोल एनर्जी पर अपनी उत्पादकता को घटाया है। केवल चीन के अपवाद को छोड़ दे तो भारत ने एक साल में पवन और सौर ऊर्जा के उत्पादन में रिकार्ड 10 फीसदी का इजाफा किया है। थिंक टैंक एंबर द्वारा जारी रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया की 83 फीसदी बिजली का प्रतिनिधित्व करने वाले 48 देशों के विश्लेषण से निकल कर आया है कि दुनिया ने कोरोना काल में वैकल्पिक ऊर्जा के संसाधनों को विकसित करने पर खासा जोर दिया है।
भारत में 2015 में कुल बिजली उत्पादन में 3 फीसदी पवन से और सोलर ऊर्जा की थी जो कि 2020 की पहली छमाही में 10 फीसदी हो गई। इसी बीच 2020 में भारत में के कोयला उत्पादन में 14 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। जिसके कारण भारत में बिजली के संयंत्रों के काम करने वाले कोयले की हिस्सेदारी 2015 में 77 फीसदी घटकर 2020 की पहली छमाही में 68 फीसदी हो गई।
अमेरिका और यूरोप ने भी अपने कोयले को उपयोग को किया कम
भारत ही नहीं अमेरिका और यूरोप ने भी अपने कोयले को उपयोग को कम किया है, दुनिया में कोयला उत्पादन में उनकी हिस्सेदारी 2015 के 23 फीसदी से घटकर 2020 में घटकर 12 फीसदी रह गई है। इस अध्ययन को अंजाम देने वाले डेबर जोंस एंबर जो कि का कहना है कि दुनिया के सभी देश कोयले के बजाए गैस और सूर्य की रोशनी पर आधारित ऊर्जा को लगातार बढ़ावा दे रहे हैं। जलवायु परिवर्तन को 1.5 डिग्री तक सीमित रखने के एक प्रयास के लिए भी कोयले के उत्पादन में हर साल 13 फीसदी की कमी आनी चाहिए।