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बाजार पूंजीवाद के 'चमत्कारी सिद्धांत' महामारी में हो गए नाकाम, सुधार की जरूरत: पोप फ्रांसिस

Sun, 04 Oct 2020 07:19 PM IST
संजीव कुमार झा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, रोम
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Pope Francis(file Photo) - फोटो : pixabay
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कोरोना महामारी के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी भारी घाटा हुआ है। अर्थव्यवस्था के इस तरह से हुए नुकसान पर पोप फ्रांसिस ने चिंता जताई है। उन्होंने कहा है कि कोरोना महामारी ने यह साबित कर दिया है कि बाजार पूंजीवाद के ‘चमत्कारी सिद्धांत’ नाकाम हो गए हैं।

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उन्होंने कहा कि साथ ही, विश्व को एक नयी तरह की राजनीति की जरूरत है, जो वार्ता एवं एकजुटता को बढ़ावा दे तथा हर कीमत पर युद्ध को खारिज करे।

दरअसल फ्रांसिस ने कोविड महामारी के बाद की दुनिया के लिए अपना दृष्टि पत्र जारी किया। इसमें उन्होंने सामाजिक शिक्षा के मूल तत्वों को समाहित किया है। इस दृष्टि पत्र का शिर्षक ‘‘सभी भाई हैं’’ दिया गया है।

अब इस शीर्षक ने विवाद छेड़ दिया है क्योंकि इसमें ‘‘फ्रेटेली’’ (भाई) शब्द का जिक्र है, जो लैंगिक समानता के अनुरूप नहीं है। हालांकि, वेटिकन ने कहा कि यह शिर्षक किसी भी तरह से भेदभाव करने वाला नहीं है बल्कि यह महिलाओं का भी समावेशन करता है।
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इसमें, फ्रांसिस ने वैध रक्षा के साधन के रूप में युद्ध को सही ठहराने वाले कैथोलिक चर्च के अपने सिद्धांत को भी सिरे से खारिज कर दिया।  उन्होंने कहा कि यह सदियों से व्यापक रूप से लागू किया जाता रहा है लेकिन अब यह व्यवहार्य नहीं रह गया है। 

उन्होंने कहा कि महामारी ने उनकी इस कथन की पुष्टि की है कि मौजूदा राजनीतिक और आर्थिक संस्थाओं में करने की आवश्यकता है ताकि महामारी से  प्रभावित हुए लोगों की आधारभूत जरूरतों को इस संकट की स्थिति में पूरा किया जा सके।

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