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PNB scam: मेहुल को भारत लाने का है यह बेहतर मौका, क्या आ सकती हैं कानूनी अड़चनें? यहां पढ़ें सभी दांव-पेंच

Thu, 03 Jun 2021 12:36 PM IST
दीप्ति मिश्रा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, रोसो

सार

डोमिनिका की एक अदालत के आज यानी गुरुवार के फैसले से स्पष्ट होगा कि मेहुल चोकसी को भारत लाने का रास्ता साफ होगा या फिर कानूनी दांव-पेच की वजह से वह बच जाएगा।
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Mehul Choksi - फोटो : ANI
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विस्तार
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पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) घोटाले का आरोपी और भगोड़ा कारोबारी मेहुल चोकसी के प्रत्यर्पण को लेकर आज यानी गुरुवार को डोमिनिका की अदालत अपना फैसला सुना सकती है। डोमिनिका की एक अदालत ने मेहुल चोकसी के भारत प्रत्यर्पण को लेकर बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान फैसला गुरुवार तक के लिए टाल दिया। सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। अदालत के आज के फैसले से स्पष्ट होगा कि मेहुल चोकसी को भारत लाने का रास्ता साफ होगा या फिर कानूनी दांव-पेच की वजह से वह बच जाएगा।

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 मेहुल चोकसी क्यूबा भागते वक्त रास्ते में ही डोमिनिका में पकड़ा गया। मेहुल चोकसी के पास एंटीगुआ की नागरिकता है। मेहुल चोकसी की करतूतों से परेशान एंटीगुआ की सरकार ने डोमिनिका से उसे सीधे भारत को सौंपने का अनुरोध किया है। अगर ऐसा होता है कि नीरव मोदी से पहले मेहुल चोकसी भारत आ सकता है। 

मेहुल के वकील ने रखा ये पक्ष
मेहुल चोकसी के वकील विजय अग्रवाल का कहना है कि जिस वक्त गीतांजलि समूह के अध्यक्ष और व्यापारी चोकसी ने एंटीगुआ की नागरिकता हासिल कर ली, उसी वक्त से वह भारत का नागरिक नहीं रह गया। इसलिए कानूनी रूप से इमिग्रेशन और पासपोर्ट एक्ट के सेक्शन 17 और 23 के अनुसार, उसे सिर्फ एंटीगुआ ही भेजा जा सकता है। वकील ने दावा किया है कि एंटीगुआ के अधिकारियों के बयान के विपरीत चोकसी डोमिनिका भागा नहीं था। उसे हनीट्रैप के जरिये फंसाया गया था और अगवा कर लिया गया था। चोकसी की पिछले छह महीनों से एक महिला के साथ दोस्ती थी, जिसे 23 मई को एंटीगुआ के एक अपार्टमेंट में बुलाया गया था। वहां से ही चोकसी को कुछ लोगों ने अगवा कर लिया था। इसके बाद डोमिनिका ले जाने से पहले उसे कथित तौर पर पीटा गया। एक यॉट में बंधक बनाकर रखा गया और कई तरह से टॉर्चर किया गया।

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अदालत में सात वकीलों ने रखा मेहुल का पक्ष

चोकसी को वापस लाने डोमिनिका पहुंची भारतीय केंद्रीय एंजेंसियों की विशेष टीम ने बताया कि सुनवाई के दौरान अदालत में सात वकील चोकसी का पक्ष रख रहे थे। डोमिनिका के विपक्षी लेनोक्स लिंटन भी कोर्ट में मौजूद थे। बता दें कि मेहुल के भाई चेतन चिनुभाई चोकसी ने पिछले शनिवार को लिंटन से मुलाकात कर मेहुल की मदद के बदले चुनाव में मदद करने का वादा किया था। इस दौरान चेतन ने अग्रिम राशि के तौर पर उन्हें दो लाख डॉलर दिए और आने वाले आम चुनावों में एक मिलियन डॉलर से ज्यादा की वित्तीय मदद का भरोसा दिया। 





...इसलिए भारत का दावा मजबूत
मेहुल चोकसी का पीछा करने वाली भारतीय एजेंसियों के सूत्रों का कहना है कि हो सकता है कि उसने अपना पासपोर्ट सरेंडर कर दिया हो, लेकिन भारत ने इसे स्वीकार नहीं किया है। साथ ही उसे पासपोर्ट सरेंडर का सर्टिफिकेट जारी नहीं किया गया है। सूत्रों का कहना है कि इंटरपोल ने भारत में किए गए वित्तीय अपराधों के लिए चोकसी के खिलाफ रेड नोटिस जारी किया है और इस पर अदालत में बहस होगी।

विदेश मंत्रालय के मुताबिक, पासपोर्ट अधिनियम 1967 के अनुसार, सभी भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए यह अनिवार्य है कि वे विदेशी नागरिकता प्राप्त करने के तुरंत बाद अपने पासपोर्ट नजदीकी भारतीय मिशन/पोस्ट को सौंप दें। भारतीय पासपोर्ट का दुरुपयोग पासपोर्ट अधिनियम 1967 की धारा 12(1ए) के तहत एक अपराध है। 
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क्या कहता है कानून

मेहुल चोकसी की नागरिकता का सवाल है तो कानून बहुत स्पष्ट है। भारत दोहरी नागरिकता की अनुमति नहीं देता है। भारतीय नागरिकता अधिनियम, 1955 की सेक्शन 9 के अनुसार, कोई भी भारतीय नागरिक जो विदेशी नागरिकता प्राप्त करता है, भारतीय नागरिक नहीं रह जाता है। इसलिए, सभी व्यावहारिक उद्देश्यों के लिए चोकसी एंटीगा का नागरिक बना हुआ है। भले ही वहां की सरकार ने उसकी नागरिकता रद्द करने के लिए कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी हो। इसे चोकसी ने एंटीगुआ (एंटीगा) कोर्ट में चुनौती दी है।

मेहुल का वापस लाने का सबसे अच्छा मौका
भगोड़ा मेहुल चोकसी को भारत वापस लाने का यह सबसे अच्छा मौका है। डोमिनिका के अदालत को यह समझाना है कि उसके खिलाफ एक मजबूत कानूनी मामला है और वह एक भगोड़ा अपराधी है। सूत्रों ने कहा कि भारत यह भी तर्क देगा कि एंटीगुआ की नागरिकता हासिल करने का उसका एकमात्र इरादा भारत में कानून के शिकंजे से बचना था। एक अधिकारी ने कहा कि चोकसी के खिलाफ इंटरपोल का नोटिस है, यह उसे भारत को सौंपने के लिए पर्याप्त आधार है। हालांकि, डोमिनिका के साथ भारत की प्रत्यर्पण संधि नहीं है। फिर भी भारत ने अदालत में प्रत्यर्पण की कार्यवाही का पालन किया, जो एक वर्ष से अधिक समय तक चली। ऐसे में भारत के पास चोकसी को लाने के लिए पर्याप्त आधार है।
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