चोकसी को वापस लाने डोमिनिका पहुंची भारतीय केंद्रीय एंजेंसियों की विशेष टीम ने बताया कि सुनवाई के दौरान अदालत में सात वकील चोकसी का पक्ष रख रहे थे। डोमिनिका के विपक्षी लेनोक्स लिंटन भी कोर्ट में मौजूद थे। बता दें कि मेहुल के भाई चेतन चिनुभाई चोकसी ने पिछले शनिवार को लिंटन से मुलाकात कर मेहुल की मदद के बदले चुनाव में मदद करने का वादा किया था। इस दौरान चेतन ने अग्रिम राशि के तौर पर उन्हें दो लाख डॉलर दिए और आने वाले आम चुनावों में एक मिलियन डॉलर से ज्यादा की वित्तीय मदद का भरोसा दिया।
...इसलिए भारत का दावा मजबूत
मेहुल चोकसी का पीछा करने वाली भारतीय एजेंसियों के सूत्रों का कहना है कि हो सकता है कि उसने अपना पासपोर्ट सरेंडर कर दिया हो, लेकिन भारत ने इसे स्वीकार नहीं किया है। साथ ही उसे पासपोर्ट सरेंडर का सर्टिफिकेट जारी नहीं किया गया है। सूत्रों का कहना है कि इंटरपोल ने भारत में किए गए वित्तीय अपराधों के लिए चोकसी के खिलाफ रेड नोटिस जारी किया है और इस पर अदालत में बहस होगी।
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, पासपोर्ट अधिनियम 1967 के अनुसार, सभी भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए यह अनिवार्य है कि वे विदेशी नागरिकता प्राप्त करने के तुरंत बाद अपने पासपोर्ट नजदीकी भारतीय मिशन/पोस्ट को सौंप दें। भारतीय पासपोर्ट का दुरुपयोग पासपोर्ट अधिनियम 1967 की धारा 12(1ए) के तहत एक अपराध है।
मेहुल चोकसी की नागरिकता का सवाल है तो कानून बहुत स्पष्ट है। भारत दोहरी नागरिकता की अनुमति नहीं देता है। भारतीय नागरिकता अधिनियम, 1955 की सेक्शन 9 के अनुसार, कोई भी भारतीय नागरिक जो विदेशी नागरिकता प्राप्त करता है, भारतीय नागरिक नहीं रह जाता है। इसलिए, सभी व्यावहारिक उद्देश्यों के लिए चोकसी एंटीगा का नागरिक बना हुआ है। भले ही वहां की सरकार ने उसकी नागरिकता रद्द करने के लिए कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी हो। इसे चोकसी ने एंटीगुआ (एंटीगा) कोर्ट में चुनौती दी है।
मेहुल का वापस लाने का सबसे अच्छा मौका
भगोड़ा मेहुल चोकसी को भारत वापस लाने का यह सबसे अच्छा मौका है। डोमिनिका के अदालत को यह समझाना है कि उसके खिलाफ एक मजबूत कानूनी मामला है और वह एक भगोड़ा अपराधी है। सूत्रों ने कहा कि भारत यह भी तर्क देगा कि एंटीगुआ की नागरिकता हासिल करने का उसका एकमात्र इरादा भारत में कानून के शिकंजे से बचना था। एक अधिकारी ने कहा कि चोकसी के खिलाफ इंटरपोल का नोटिस है, यह उसे भारत को सौंपने के लिए पर्याप्त आधार है। हालांकि, डोमिनिका के साथ भारत की प्रत्यर्पण संधि नहीं है। फिर भी भारत ने अदालत में प्रत्यर्पण की कार्यवाही का पालन किया, जो एक वर्ष से अधिक समय तक चली। ऐसे में भारत के पास चोकसी को लाने के लिए पर्याप्त आधार है।