प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संयुक्त राष्ट्र आम सभा के मंच से शुक्रवार को दुनिया को संबोधित करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी दुनिया को जम्मू-कश्मीर पर लिए गए सरकार के फैसले की जरूरतों के बारे में बताएंगे और आतंकवाद के खिलाफ दुनिया से एकजुट होने का आह्वान करेंगे।
भारत ने पाकिस्तान का नाम लिए बिना आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में आतंकियों को शरण और वित्तीय मदद देने वाले देशों की पहचान पर जोर दिया। विदेश राज्य मंत्री वी. मुरलीधरन बुधवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंत्रिस्तरीय बहस को संबोधित कर रहे थे।
इस दौरान उन्होंने स्पष्ट कहा कि आतंक पर लगाम लगाने के लिए उसे बढ़ावा देने वाले देशों के खिलाफ ठोस कदम उठाना और उनकी जवाबदेही तय करना बेहद जरूरी है। मुरलीधरन ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बिना किसी विलंब के तत्काल सीसीआईटी (अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक समझौते) को स्वीकार करने की भी अपील की, जिससे आतंकवाद पर एकजुट तरीके से चोट की जा सके।
सीसीआईटी संधि का प्रस्ताव भारत ने 1996 में संयुक्त राष्ट्र में पेश किया था, लेकिन करीब ढाई दशक बाद भी सभी देश इस पर सहमति नहीं बना सके हैं। इस प्रस्तावित संधि का मकसद सभी तरह के अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद को अपराध के तौर पर चिह्नित करना और आतंकियों व उनके वित्त पोषकों और समर्थकों को वित्त, हथियारों व सुरक्षित ठिकानों से वंचित करना है।