क्या है आयरन डोम
आयरन डोम इस्राइल की उन्नत, मोबाइल और हर मौसम में काम करने वाली कम दूरी की वायु रक्षा प्रणाली है। इससे मुख्य रूप से 4 किमी से 70 किमी की सीमा के भीतर दागे गए रॉकेट और मोर्टार के गोले आदि हवा में ही पहचान कर नष्ट किए जा सकते हैं। ऑपरेशन सिंदूर के अनुभव ने यह साबित किया है कि सीमावर्ती क्षेत्रों और महत्वपूर्ण शहरों की सुरक्षा के लिए एक ऐसी प्रणाली जरूरी है जो रॉकेट और ड्रोन जैसे खतरों को रिहायशी इलाकों में गिरने से पहले ही हवा में नष्ट कर दे।
एआई चालित ड्रोन
रूवेन ने कहा कि यह यात्रा रक्षा और एआई को केंद्र में रखकर दोनों देशों को एक अटूट सुरक्षा सूत्र में बांधेगी। आने वाले समय में एआई से लैस ड्रोन विकसित किए जाएंगे। उनके बयान से पता चलता है कि दोनों देश ऐसे ड्रोन बनाने पर काम करेंगे जो मानवीय हस्तक्षेप के बिना खुद निर्णय लेकर हमला करने में सक्षम हों।
71 हजार करोड़ के रक्षा सौदे संभव
भारत सरकार के सूत्रों के मुताबिक मोदी की यात्रा के दौरान लगभग 71,000 करोड़ रुपये के रक्षा समझौतों पर मुहर लग सकती है। इनमें स्पाइस 1000 प्रिसिशन बम, हवा से जमीन पर वार करने वाली रैम्पेज मिसाइल और एयर लोरा बैलिस्टिक मिसाइलें शामिल हैं। इसके अलावा कम दूरी के खतरे बेअसर करने के लिए आधुनिक लेजर हथियारों पर तकनीकी सहयोग पर भी बात बन सकती है।
रक्षा समझौतों के साथ ही इस्राइल की ओर से प्रस्तावित नए गठबंधन पर भी चर्चा होगी। यह कट्टरपंथ और क्षेत्रीय अस्थिरता के खिलाफ भारत, इस्राइल, ग्रीस और साइप्रस जैसे देशों का एक सुरक्षा नेटवर्क होगा। प्रधानमंत्री मोदी जब इस्राइली संसद नेसेट को संबोधित करेंगे, तो पूरी दुनिया की नजरें इस नई रक्षा धुरी पर टिकी होंगी।
यात्रा ऐतिहासिक : नेतन्याहू
इस्राइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने रविवार को इस यात्रा को ऐतिहासिक करार दिया और कहा कि दोनों देशों की साझेदारी नई ऊंचाइयां छू रही है। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री मोदी को प्रिय मित्र बताया और दोनों देशों के बीच बढ़ते रणनीतिक तालमेल पर प्रकाश डाला। इस्राइली प्रधानमंत्री ने बताया कि पीएम मोदी अपने दौरे पर इस्राइली संसद नेसेट में भाषण देंगे और यरूशलम में एक नवाचार कार्यक्रम में भाग लेंगे। वे होलोकॉस्ट पीड़ितों के लिए इस्राइल के आधिकारिक स्मारक, याद वाशेम भी जाएंगे। नेतन्याहू ने बताया कि दोनों देशों के बीच एआई और क्वांटम कंप्यूटिंग समेत उच्च तकनीकी क्षेत्रों में सहयोग को भी बढ़ावा देने पर बात होगी।
पहले के प्रधानमंत्री बचते रहे इस्राइल जाने से
मोदी से पहले के सभी प्रधानमंत्री फलस्तीन के साथ एकजुटता दिखाने के लिए इस्राइल के दौरे पर जाने से बचते रहे। मोदी ने सत्ता में आने के बाद फलस्तीन के प्रति समर्थन बनाए रखते हुए इस्राइल से भी रिश्ते सुधारने का प्रयास किया और इसी का परिणाम है कि दोनों देशों के संबंध इतिहास में सबसे बेहतरीन दौर में हैं।