प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि विश्व आर्थिक व्यवस्था में स्थिरता लाने के लिए भारत और चीन का साथ काम करना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली आपसी सम्मान, साझा हितों और परस्पर संवेदनशीलता के आधार पर दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से आगे बढ़ाने के लिए तैयार है। जापान यात्रा के दौरान द योमिउरी शिंबुन को दिए साक्षात्कार में पीएम मोदी ने कहा कि भारत और चीन दुनिया की दो सबसे बड़ी आबादी वाले देश और पड़ोसी भी हैं। अगर आपसी संबंध स्थिर, पूर्वानुमेय और मैत्रीपूर्ण बनाएं, तो उसका सकारात्मक असर क्षेत्रीय और वैश्विक शांति एवं समृद्धि पर पड़ेगा।
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चीन से रिश्तों पर बोले प्रधानमंत्री मोदी
चीन के साथ संबंध सुधारने के महत्व पर पूछे गए सवाल पर मोदी ने कहा, राष्ट्रपति शी जिनपिंग के निमंत्रण पर मैं यहां से तिआनजिन जा रहा हूं ताकि एससीओ शिखर सम्मेलन में हिस्सा ले सकूं। पिछले वर्ष कजान में राष्ट्रपति शी से मेरी मुलाकात के बाद हमारे द्विपक्षीय संबंधों में निरंतर और सकारात्मक प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि दो पड़ोसी और दुनिया के दो सबसे बड़े राष्ट्रों के रूप में भारत और चीन के बीच स्थिर, पूर्वानुमानित और सौहार्दपूर्ण द्विपक्षीय संबंध क्षेत्रीय और वैश्विक शांति एवं समृद्धि पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।
'बहुध्रुवीय एशिया और बहुध्रुवीय विश्व के लिए भी महत्वपूर्ण'
उन्होंने आगे कहा कि यह बहुध्रुवीय एशिया और बहुध्रुवीय विश्व के लिए भी महत्वपूर्ण है। पीएम मोदी ने कहा, विश्व अर्थव्यवस्था में वर्तमान अस्थिरता को देखते हुए दो प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के रूप में भारत और चीन के लिए विश्व आर्थिक व्यवस्था में स्थिरता लाने के लिए मिलकर काम करना भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि भारत आपसी सम्मान, आपसी हित और आपसी संवेदनशीलता के आधार पर रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने और विकासात्मक चुनौतियों का समाधान करने के लिए रणनीतिक संचार को बढ़ाने के लिए तैयार है।
भारत-जापान और इंडो-पैसिफिक दृष्टिकोण
जापानी सरकार की फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक (मुक्त और खुला हिंद-प्रशांत) अवधारणा पर मोदी ने कहा कि इसमें जापान और भारत के बीच गहरा सामंजस्य है। उन्होंने कहा कि ‘विजन महासागर’ और इंडो-पैसिफिक ओशंस इनिशिएटिव भारत के अपने दृष्टिकोण को दर्शाते हैं। मोदी ने कहा, भारत और जापान एक शांतिपूर्ण, समृद्ध, स्थिर और ऐसा इंडो-पैसिफिक चाहते हैं जहां राष्ट्रों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान हो। दोनों देशों के इंडो-पैसिफिक क्षेत्र से गहरे रिश्ते हैं और हम कई बहुपक्षीय मंचों पर मिलकर साझा लक्ष्यों को आगे बढ़ा रहे हैं।
रूस-यूक्रेन संघर्ष पर भारत का रुख
रूस और यूक्रेन के नेताओं के साथ अपनी हालिया बातचीत के बारे में बात करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत ने इस संघर्ष पर एक सैद्धांतिक और मानवीय रुख बनाए रखा है। जिसकी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की दोनों ने समान रूप से सराहना की है। उन्होंने जापानी अखबार को बताया, इसी के अनुरूप दोनों नेताओं ने संघर्ष से संबंधित घटनाक्रमों पर अपने विचार साझा करने के लिए मुझसे बात की। मैंने भारत के सैद्धांतिक और सुसंगत रुख को दोहराया और संघर्ष को सुलझाने के लिए बातचीत और कूटनीति को प्रोत्साहित किया। मैंने पहले ही संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान के उद्देश्य से सार्थक प्रयासों का समर्थन करने की भारत की इच्छा व्यक्त की है।
ग्लोबल साउथ पर भारत का दृष्टिकोण
ग्लोबल साउथ के महत्व पर जोर देते हुए मोदी ने कहा कि वैश्विक समुदाय ने 2030 तक सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करके एक अधिक समतापूर्ण विश्व बनाने की प्रतिबद्धता जताई है। प्रधानमंत्री ने कहा, अगर हमें इस प्रतिबद्धता पर खरा उतरना है, तो ग्लोबल साउथ को प्राथमिकता देनी होगी। एक अत्यधिक परस्पर जुड़ी हुई दुनिया में, हमने ग्लोबल साउथ पर महामारी, संघर्षों और आपूर्ति श्रृंखला व्यवधानों के दुर्बल करने वाले प्रभाव को देखा है।
'ब्रिक्स में भी भारत सक्रिय रूप से कर रहा काम'
उन्होंने कहा कि उन्हें वैश्विक शासन, जलवायु परिवर्तन, खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा, ऋण और वित्तीय तनाव से जुड़ी असंख्य चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। जिनका उनकी विकास प्राथमिकताओं पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने कहा, ग्लोबल साउथ के सदस्य होने के नाते हम इन चिंताओं और लोगों के जीवन पर उनके प्रभावों को स्पष्ट रूप से समझते हैं। हमने इन्हें वैश्विक एजेंडे में सबसे आगे लाने के लिए अथक प्रयास किए हैं। उन्होंने आगे कहा कि इसी प्रकार, ब्रिक्स में भी भारत वैश्विक दक्षिण के लाभ के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा है। भारत ब्रिक्स के साथ अपने जुड़ाव को महत्व देता है, जो परामर्श और सहयोग के लिए एक मूल्यवान मंच के रूप में उभरा है और जिसने साझा हितों के विशिष्ट मुद्दों पर आपसी समझ को बढ़ावा देने में मदद की है।
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बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार की जरूरत
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत लगातार वैश्विक बहुपक्षीय संस्थाओं में तात्कालिक और व्यापक सुधार की मांग करता रहा है ताकि वे वर्तमान भू-राजनीतिक और आर्थिक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित कर सकें। उन्होंने कहा, भारत ने वैश्विक बहुपक्षीय संस्थानों में तत्काल और व्यापक सुधारों का भी लगातार आह्वान किया है ताकि उन्हें और अधिक प्रभावी बनाया जा सके और वर्तमान भू-राजनीतिक और आर्थिक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित किया जा सके। उन्होंने बताया कि 2004 में अपनी स्थापना के बाद से पिछले 20 वर्षों में क्वाड वैश्विक भलाई की एक शक्ति के रूप में उभरा है और हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लोगों के लिए सकारात्मक परिणाम प्रदान कर रहा है।