मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जापान, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, चिली, ब्राजील, नाइजीरिया और बारबाडोस शामिल हैं। चीन-भारत ने 2030 तक नवीकरणीय ऊर्जा में तीन गुना वृद्धि के लिए समर्थन व्यक्त किया है, लेकिन शनिवार को औपचारिक रूप से व्यापक प्रतिज्ञा का समर्थन नहीं किया।
संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी दुबई में कॉप-28 शिखर सम्मेलन जारी है। सम्मेलन में आज 2030 तक दुनिया की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को तीन गुना करने की प्रतिज्ञा पर हस्ताक्षर करने से भारत और चीन ने इनकार कर दिया। हालांकि, नई दिल्ली पहले से ही जी20 अध्यक्षता के वक्त से इसके लिए प्रतिबद्ध है। प्रतिज्ञा का लक्ष्य दुनिया के समग्र ऊर्जा उत्पादन में जीवश्म ईंधन पर निर्भरता को कम करना है।
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प्रतिज्ञा के तहत इन फैसलों को लागू करने की मांग
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जापान, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, चिली, ब्राजील, नाइजीरिया और बारबाडोस शामिल हैं। चीन-भारत ने 2030 तक नवीकरणीय ऊर्जा में तीन गुना वृद्धि के लिए समर्थन व्यक्त किया है, लेकिन शनिवार को औपचारिक रूप से व्यापक प्रतिज्ञा का समर्थन नहीं किया। प्रतिबद्धता के तहत जीवाश्म ईंधन के उपयोग में कमी के साथ-साथ स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ाना भी शामिल है। इसके तहत कोयला बिजली को चरणबद्ध तरीके से बंद करना और कोयले से चलने वाले नए बिजली संयंत्रों की फंडिंग को भी रोकने के लिए आह्वान किया गया। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी का कहना है कि जीवाश्म ईंधन की मांग को कम करने और ग्लोबल वार्मिंग को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को तीन गुना करना होगा। भारत के फैसले पर भारतीय विशेषज्ञों की मिली-जुली प्रतिक्रिया आई है।
विशेषज्ञों ने कही यह बात
ई3जी में सीनियर एसोसिएट और इंडिया एनर्जी ट्रांजिशन लीड मधुरा जोशी ने वैश्विक प्रतिज्ञा पर हस्ताक्षर नहीं करने के भारत के फैसले पर निराशा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि निर्णायक फैसलों की शुरुआत में सितंबर 2023 में जी20 नेताओं ने इसका समर्थन किया था। विश्व संसाधन संस्थान भारत में जलवायु की कार्यकारी निदेशक उल्का केलकर ने भारत के राष्ट्रीय निर्धारित योगदान (एनडीसी) लक्ष्य की भयावहता पर प्रकाश डाला, जिसके लिए देश को उतनी ही नवीकरणीय क्षमता बनाने की आवश्यकता है। अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन के महानिदेशक डॉ. अजय माथुर, 2030 तक नवीकरणीय क्षमता को तीन गुना करने की वैश्विक प्रतिबद्धता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हैं।
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पर्वतीय देशों की जरूरतों पर प्रतिक्रिया देनी चाहिए
हिमालय की संभावित तबाही की चेतावनी देते हुए संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंटोनियो गुटेरेस ने शनिवार को बताया विकासशील देशों को विशेष रूप से कमजोर पर्वतीय देशों की जरूरतों पर प्रतिक्रिया देनी चाहिए, जिन्हें तत्काल मदद की जरूरत है। देश-दुनिया के लगभग 240 मिलियन लोग हिमालय से निकलने वाली सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र जैसी 10 प्रमुख नदियों पर निर्भर हैं। भारत सहित आठ देशों में नदियों के निचले प्रवाह में रहने वाले एक अरब लोग ग्लेशियर से पोषित नदियों पर निर्भर हैं।