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ऑस्ट्रेलियाई धरती पर राफेल: US-जापान के विमानों के साथ भारत का युद्धाभ्यास, पिच ब्लैक 2026 में खास क्या?

Tue, 21 Jul 2026 04:54 AM IST
ज्योति भास्कर आशुतोष भाटिया, अमर उजाला।

सार

  • बहुराष्ट्रीय युद्धाभ्यास- पिच ब्लैक 2026 ऑस्ट्रेलिया में शुरू हो चुका है।
  • भारत के अलावा इसमें अमेरिका और जापान की सेना भी ताकत का प्रदर्शन करेगी।
  • ऑस्ट्रेलिया की धरती पर पांचवीं पीढ़ी के विमानों के बीच राफेल दिखाएगा दम।
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पिच ब्लैक युद्धाभ्यास (सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एएनआई (फाइल)
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विस्तार
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ऑस्ट्रेलिया में 21 देशों की वायुसेना के 100 से ज्यादा विमानों और 2500 सैन्यकर्मियों की भागीदारी के साथ सोमवार को बहुराष्ट्रीय युद्धाभ्यास पिच ब्लैक 2026 शुरू हो गया। भारतीय वायुसेना ने तीन सप्ताह लंबे इस अभ्यास में 4 राफेल लड़ाकू विमान, 2 सी-17 ग्लोबमास्टर परिवहन विमानों, एक आईएल-78 मिड-एयर रिफ्यूलर और 120 वायु सैनिकों के दल को भेजा है।

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राफेल के अलावा कौन से विमान भेज चुका है भारत?
इस बार वायुसेना ने पहली बार अपने सबसे घातक लड़ाकू विमान राफेल को इस अभ्यास में उतारा है। साल 2018 में अपनी पहली भागीदारी और फिर कोविड काल के बाद 2022 में वायुसेना ने सुखोई-30 पर भरोसा जताया था।

युद्धाभ्यास में 120 भारतीय वायु सैनिक, कितने देश हैं शामिल?
2024 में वायुसेना ने सुखोई के साथ मिड-एयर रिफ्यूलर्स का कॉम्बिनेशन आजमाया था। इस बार राफेल को उतारा है। युद्धाभ्यास में शामिल अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान अपने एफ-35 लाइटनिंग जैसे पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमानों के साथ मैदान में उतरे हैं।
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फ्रांस में बना राफेल इतना खास क्यों?
राफेल 4.5 पीढ़ी का लड़ाकू विमान है, लेकिन इसकी उन्नत सेंसर क्षमता, रडार और स्पेक्ट्रा इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर प्रणाली इसे आधुनिक खतरों से मुकाबले के लिए सक्षम बनाती है। पिच ब्लैक में राफेल की तैनाती का अहम उद्देश्य भारतीय पायलटों को एफ-35 और एफ-22 रैप्टर जैसे पांचवीं पीढ़ी के विमानों से लैस वायुसेना के साथ अभ्यास का अनुभव देना है, ताकि वायुसेना भविष्य के नेटवर्क-केंद्रित अभियानों के लिए अपनी रणनीति तैयार कर सके। यह बदलाव महत्वपूर्ण है, क्योंकि पिच ब्लैक में वायुसेनाएं लंबी दूरी के आक्रामक अभियानों के लिहाज से अपनी तैयारी करेंगी।

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