डेल्टा वैरिएंट को नाकाम करने के लिए फाइजर नया टीका बनाएगा। कंपनी ने बृहस्पतिवार को बताया कि दुनिया के 98 से अधिक देशों में फैल चुका डेल्टा रूप दुनिया के लिए चिंता का सबब बन गया है। इसी को ध्यान में रखकर कंपनी डेल्टा वैरिएंट को लेकर अगस्त में परीक्षण शुरू कर सकती है।
दावा : तीसरी डोज लगने से बचाव की गुंजाइश अधिक
कंपनी का कहना है कि वैज्ञानिक अध्ययनों से पता चला है कि अल्फा वैरिएंट से डेल्टा 50 फीसदी ज्यादा संक्रामक है। जबकि सबसे पहले मिले कोरोना वायरस की तुलना में 2 गुना अधिक संक्रामक है। कंपनी का कहना है कि डेल्टा वैरिएंट उन देशों में तेजी से पांव पसार रहा है, जहां टीका नहीं लगा है।
इसमें मलेशिया, पुर्तगाल, इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश शामिल हैं। अमेरिका में भी डेल्टा वैरिएंट का प्रसार अधिक हो गया है। नए मिलने वाले 50 फ़ीसदी से अधिक मामले डेल्टा वैरिएंट के हैं।
डेल्टा वैरिएंट से जूझ रहे अमेरिका में बूस्टर डोज को लेकर बहस शुरू हो गई है। अमेरिकी फार्मा कंपनी फाइजर और जर्मन कंपनी बायोएनटेक ने कहा कि वह बूस्टर डोज के तौर पर लोगों को टीके की तीसरी डोज लगाने के लिए अनुमति लेने की तैयारी कर रहे हैं।
वहीं अमेरिका एजेंसी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) और सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन ने कहा है कि अमेरिकी लोगों को अभी बूस्टर डोज की जरूरत नहीं है। इस मामले में जल्दबाजी की जरूरत नहीं है।
फाइजर के बयान पर अमेरिका ने कहा कि टीके की दो खुराक लगवा चुके लोगों को अभी बूस्टर डोज की जरूरत नहीं है। ऐसे लोगों को वायरस यहां तक भी सबसे अधिक संक्रामक माने जा रहे डेल्टा से भी कम खतरा है।