पाकिस्तान के पेट्रोलियम भंडार में पेट्रोल की मात्रा इतिहास के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है। अब भंडार में इतना पेट्रोल है कि अगर कोई आयात ना हो, तब भी 26 दिन तक सबकी जरूरतें पूरी हो सकती हैं। रिफाइनरी कारखानों ने चेतावनी दी है कि अगर बिजली संयंत्रों ने तेल की खरीदारी तेज नहीं की, तो उन्हें अपना कारोबार बंद करना पड़ेगा।
भंडार में छह लाख टन से ज्यादा पेट्रोल
सरकारी अधिकारियों के मुताबिक देश में अपेक्षा से कम मांग के कारण ये स्थिति पैदा हुई है। अब देश के भंडार में छह लाख टन से ज्यादा पेट्रोल एकत्र हो गया है। तेल उद्योग का अनुमान था कि नवंबर में देश में आठ लाख टन पेट्रोल की खपत होगी। लेकिन असल मांग उससे बहुत कम रही। एक सरकारी अधिकारी ने अखबार एक्सप्रेस ट्रिब्यून से कहा- ‘पाकिस्तान के इतिहास में भंडार में इतना पेट्रोल पहली बार इकट्ठा हुआ है।’
तेल उद्योग के सूत्रों ने बताया है कि इस वक्त पाकिस्तान में सामान्य से काफी कम पेट्रोल की खपत हो रही है। मौजूदा बिक्री के आधार पर तेल उद्योग का चलना माफिक नहीं है। तेल उद्योग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने एक्सप्रेस ट्रब्यून से कहा कि अगर खपत की मौजूदा हालत ही बनी रही, तो अगले कुछ दिन में रिफाइनरियां बंद होने लगेंगी। इससे पूरे पाकिस्तान में तेल और गैस की सप्लाई ठप होने की स्थिति पैदा हो जाएगी।
एटॉक रिफाइनरी लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आदिल खटक ने इस बारे में तेल विभाग के महानिदेशक को एक पत्र भेजा है। इसमें उन्होंने आरोप लगाया है कि देश के बिजली कारखाने भारी मात्रा में तेल का आयात कर रहे हैं, जबकि वे देश की रिफाइनरियों से तेल नहीं खरीद रहे हैं। खटक ने कहा कि जिस समय रिफाइनरियों के सामने बंद होने की स्थिति है, तब तेल उद्योग से मिट्टी तेल (केरोसीन) का उत्पादन बढ़ाने को कहा गया है। उन्होंने कहा कि ये सारी समस्या योजना और समन्वय के अभाव की वजह से पैदा हुई है।
कारखाने को बंद करने के हालात
पाकिस्तान रिफाइनरी लिमिटेड के सीईओ जाहिद मीर ने भी तेल विभाग के महानिदेशक को पत्र भेजा है। इसमें उन्होंने बताया है कि नवंबर में पाकिस्तान रिफाइनरी लिमिटेड ने तेल का कुल उत्पादन 7,109 टन किया। जबकि उससे 5,875 टन तेल की ही खरीदारी की गई। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान रिफाइनरी लिमिटेड दिसंबर में 3,244 टन तेल का उत्पादन कर चुका है, जबकि उससे बिल्कुल ही कोई खरीदारी नहीं की गई है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर अगले दस दिन तक यही हालात रहे तो इस कारखाने को बंद कर दिया जाएगा।
रिफाइनरी अधिकारियों ने सरकार से कहा है कि वह बिजली संयंत्रों को उनसे तेल खरीदने के लिए प्रोत्साहित करे। इस बीच पर्यवेक्षकों का कहना है कि असल समस्या देश में बढ़ी महंगाई है। रोजमर्रा की जिंदगी की महंगी होने के कारण लोगों ने पेट्रोलियम और बिजली का उपभोग घटा दिया है। इसकी वजह से पेट्रोलियम की मांग गिर गई है। इससे महंगाई से पहले से ही जूझ रही इमरान खान सरकार के सामने पेट्रोलियम उद्योग को बचाने की एक और चुनौती खड़ी हो गई है।