संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत टी एस तिरुमूर्ति ने गांधी जयंती के अवसर पर कहा कि यदि हम गांधीजी को प्रारंभिक रूप से शांति और अहिंसा के दूत के रूप में देखते हैं तो मुझे लगता है कि हम कुछ कमी छोड़ रहे होंगे।
ऐसा इसलिए क्योंकि हम एक निर्वात में अहिंसा की बात नहीं कर रहे। उन्होंने कहा कि अहिंसा हमेशा से ज्वलंत मुद्दों से संबंधित रही है और आगे भी रहेगी। उन्होंने कहा कि हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि ये मुद्दे हमारे लिए बाहरी ही नहीं हैं बल्कि आंतरिक भी हैं।
तिरुमूर्ति ने कहा कि गांधी का अंतिम लक्ष्य सत्य को पाना था और उन्होंने महसूस किया कि केवल सत्य का पीछा करने से ही सही मायने में अहिंसा हो सकती है। इसी तरह उनके लिए अहिंसा खुद में सत्य का पीछा करना था।
समारोह में संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत कैली क्राफ्ट, संयुक्त राष्ट्र में बांग्लादेश की स्थायी प्रतिनिधि रबाब फातिमा और संयुक्त राष्ट्र में जापान के राजदूत इशिकाने किमिहिरो आदि ने भी संबोधित किया।
महात्मा गांधी का अहिंसा और समानता का संदेश आज भी प्रासंगिक : यूएन प्रमुख
यूएन चीफ एंटोनियो गुटेरस ने शुक्रवार को कहा कि महात्मा गांधी की 151वीं जयंती उनके मूल्यों को बरकरार रखने का प्रयास करने के लिए सही समय पर आया रिमाइंडर है। उन्होंने यह बात उस समय कही, जब पूरे विश्व से आए राजनयिक अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के इस मौके पर गांधी के न्याय व सभी के लिए समानता के सिद्धांतों की अहमियत पर जोर दे रहे थे।
संयुक्त राष्ट्र (यूएन) में भारत के स्थायी मिशन ने गांधी की 150वीं जयंती के समारोहों के समापन और अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के उपलक्ष्य में एक वर्चुअल समारोह का आयोजन किया था। इस समारोह में यूएन महासचिव गुटेरस ने अपने वीडियो संदेश में कहा, महात्मा गांधी के जन्म दिन को चिह्नित करते हुए यह अंतरराष्ट्रीय दिवस अहिंसा और शांतिपूर्ण प्रदर्शनों की अमिट शक्ति को उजागर करता है।
यह गांधी द्वारा जिये गए गरिमा का प्रचार, सभी के लिए समान संरक्षण और समुदायों का शांति से एकसाथ रहना जेसे मूल्यों को बनाए रखने के प्रयासों की भी समय पर याद दिलाता है।