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मसूढ़ों की तकलीफ से पीड़ित लोगों को कोरोना संक्रमण का खतरा, नए शोध में किया दावा

Tue, 11 Aug 2020 10:52 AM IST
Tanuja Yadav वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
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मसूढ़ों की तकलीफ से पीड़ित लोगों को भी कोरोना का ज्यादा खतरा - फोटो : getty images
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कोरोना वायरस का सबसे ज्यादा खतरा सिर्फ मोटे या बीमार लोगों को नहीं बल्कि मसूढ़ों की तकलीफ से पीड़ित लोगों को भी है। कैलिफोर्निया और ब्राजील के शोधकर्ताओं ने कोरोना संक्रमित मरीजों पर किए अध्ययन के बाद यह दावा किया है। वैज्ञानिकों का कहना है मसूढ़ों की तकलीफ वाले लोगों को ह्रदय रोग के साथ फेफड़ों का गंभीर रोग होने का खतरा रहता है।

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कोरोना की चपेट में आने वाले मरीजों में ह्रदय और फेफड़े संबंधी तकलीफें ज्यादा देखने को मिल रही हैं और ऐसे मरीजों के मौत का आंकड़ा भी ज्यादा है। कोरोना वायरस को लेकर देश-विदेश के शोधकर्ता नई-नई स्टडी लेकर आ रहे हैं ताकि उसका अध्ययन करके ज्यादा से ज्यादा लोगों को बचाया जा सके।

कोरोना के अधिकतर मरीजों यह रोग
लॉस एंजलिस की डेंटल सर्जन डॉ शोर्विन मलायेम का कहना है कि अधिकतर मरीज जो वायरस की चपेट में आए, उनमें आईएल-छह प्रोटीन का स्तर ज्यादा होने के साथ मसूढ़ों से संबंधित तकलीफ थी। बैक्टीरिया खुद को मसूढ़ों के पीछे छिपा लेता है। शरीर इनसे लड़ने के लिए इम्यूनिटी बनाता है जिसमें आईएल-छह भी होता है। प्रोटीन का स्तर अधिक होने से वायरस उन पर चिपक कर अपनी संख्या बढ़ाने का काम करता है। कोरोना में आईएल-छह खतरनाक और भयावह हो सकता है।
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जिंदा रहने के लिए वेंटिलेटर की जरूरत
शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में पाया है कि कोरोना के मरीजों में इन्फलेमेंट्री इम्यून प्रोटीन इंटरल्युकिन-छह की मात्रा ज्यादा मिली है। आईएल-छह प्रोटीन मसूढ़ों की तकलीफ से पीड़ित मरीजों में ज्यादा होता है। कोरोना संक्रमण के गंभीर अवस्था में जाने वाले ऐसे मरीजों को जिंदा रखने के लिए वेंटिलेटर की जरूरत पड़ती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि साफ-सफाई और इलाज से आईएल-छह प्रोटीन के स्तर को घटाकर संक्रमण के खतरे को कम किया जा सकता है।

ऊतकों और रक्त वाहिकाओं को नुकसान 
डॉ मलायेम का कहना है कि आईएल-छह प्रोटीन के अधिक उत्सर्जन से हड्डियों को नुकसान होता है। यह शरीर के भीतर मौजूद ऊतकों को क्षतिग्रस्त करता है। इसके साथ ही रक्त वाहिकाओं में मौजूद कोशिकाओं को भी प्रभावित करता है। जिससे ह्रदय पर काम का बोझ बढ़ता है। कोरोना संक्रमित मरीज में जब ये सब तकलीफें होंगी तो उसकी परेशानी और बढ़ेंगी। कोरोना मरीजों की हार्ट-अटैक से मौत का एक बड़ा कारण हो सकता है।

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