पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने ट्वीट किया दिलीप साहब के निधन की खबर सुनकर बहुत दुखी हूं। वह एक शानदार कलाकार, विनम्र इंसान और शानदार व्यक्तित्व के धनी थे। उनके परिवार और उनके प्रशंसकों के प्रति मेरी संवेदनाएं। उनकी आत्मा को शांति मिले।
दिलीप कुमार के दुनिया से रुख्सत होते ही पेशावर स्थित उनके पुश्तैनी घर पर उन्हें चाहने वालों का जमावड़ा लग गया। दिलीप रहते तो मुंबई में थे पर दुनियाभर में अपने चाहने वालों के दिलों पर वह राज करते थे।
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पाकिस्तान के पेशावर के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में 11 दिसंबर 1922 को पैदा हुए युसूफ खान उर्फ दिलीप कुमार को वहां की सरकार ने अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान निशान-ए- इम्तियाज से नवाजा था। उनके निधन पर पाकिस्तान के आम आदमी के साथ ही खास लोगों ने भी उनके निधन पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने ट्वीट किया दिलीप साहब के निधन की खबर सुनकर बहुत दुखी हूं। वह एक शानदार कलाकार, विनम्र इंसान और शानदार व्यक्तित्व के धनी थे। उनके परिवार और उनके प्रशंसकों के प्रति मेरी संवेदनाएं। उनकी आत्मा को शांति मिले।
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वहीं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने लिखा, दिलीप कुमार के गुजर जाने का दुख है। उन्होंने एसकेएमटीएच (कैंसर हॉस्पिटल) प्रोजेक्ट लॉन्च होने के वक्त फंड जुटाने में जो उदारता दिखाई थी, उसे मैं कभी भूल नहीं सकता।
10 फीसदी शुरुआती फंड जुटाना बहुत मुश्किल था और पाक और लंदन में सिर्फ उनकी मौजूदगी की वजह से बड़ी राशि जुट गई। इसके अलावा मेरी पीढ़ी के लिए दिलीप कुमार सबसे महान और प्रतिभाशाली अभिनेता थे।
पैतृक शहर के लिए लगाव रहेगा याद
खैबर पख्तूनख्वा प्रांत की सरकार ने कुमार के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि अपने पैतृक शहर के लिए उनके लगाव को स्थानीय लोगों द्वारा हमेशा याद रखा जाएगा। प्रांत के मुख्यमंत्री महमूद खान ने कहा कि कुमार के साथ ही भारतीय फिल्म जगत के एक स्वर्णिम अध्याय का अंत हो गया। लेकिन वह लोगों के दिलों में हमेशा जिंदा रहेंगे। अभिनय के क्षेत्र में उनका योगदान लंबे समय तक याद रखा जाएगा।