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पेंटागन की रिपोर्ट में चेतावनी, सैन्य ताकत में रूस-चीन से पिछड़ सकता है अमेरिका

Mon, 30 Nov 2020 04:43 PM IST
गौरव पाण्डेय डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, वाशिंगटन

सार

  • 2049 तक पीएलए को दुनिया की सबसे मजबूत सेना बनाने पर काम कर रहा है चीन
  • अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने भी चीन और रूस की तैयारियों को देखते हुए बनाई रणनीति
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पेंटागन
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विस्तार
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चीन की बढ़ती सैनिक ताकत से अमेरिका में चिंता गहरा गई है। अब ये बात औपचारिक रूप से सामने आई है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय, पेंटागन ने अपनी ‘2020 मिलिट्री पावर रिपोर्ट’ में आगाह किया है कि कई सैनिक आविष्कारों के मामले में अमेरिका चीन से पिछड़ रहा है। ताजा रिपोर्ट में ध्यान दिलाया गया है कि चीन अपनी सेना को आधुनिक बनाने का कार्यक्रम चला रहा है, जिसे वह 2035 तक पूरा कर लेगा। 2049 तक वह अपनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) को ‘विश्व-स्तरीय’ सेना बनाने की योजना पर मुस्तैदी से काम कर रहा है।

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पेंटागन की इस सालाना रिपोर्ट में कहा गया है कि जिस तेजी से पीएलए ने प्रगति की है, उससे पेंटागन वाकिफ है। पेंटागन ने बड़े ढांचागत सुधार किए हैं। इसके तहत देश में बनी आधुनिक युद्ध प्रणालियों को तैनात किया गया है। चीन ने अपनी मुस्तैदी और साझा अभियान करने की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि की है। रिपोर्ट में सैन्य तकनीक के मामले में रूस की प्रगति का भी जिक्र है। कहा गया है कि रूस और चीन दोनों की नई तकनीकी क्षमता से ही ये धारणा बनी है कि अमेरिका के दुनिया की अकेली महाशक्ति होने के दिन अब लद रहे हैं।


पेंटागन ने कहा है कि आने वाले वर्षों में युद्ध के जो नए क्षेत्र सामने होंगे, बाकी दुनिया ने उसके प्रति आंख मूंद रखी है। जबकि रूस और चीन ने इसी दिशा में प्रगति की है। इसमें कहा गया है कि अगर अमेरिका भावी युद्धों में रूस और चीन के मुकाबले की ताकत बने रहना चाहता है, तो उसे इन मामलों में आगे कदम बढ़ाने होंगे।
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रिपोर्ट में खासकर तीन तरह की तकनीक में रूस और चीन की प्रगति का जिक्र किया गया है। इनमें एक हाइपरसोनिक अस्त्र हैं। रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन ने पिछले साल दिसंबर में कहा था कि रूस दुनिया की अकेली ताकत है, जिसके पास हाइपरसोनिक हथियार तैनात करने की क्षमता है। तब उन्होंने दावा किया था कि इतिहास में ये पहला मौका है, जब किसी नए प्रकार के हथियार के मामले में रूस दुनिया की अग्रणी ताकत बन गया है।

ताजा रिपोर्ट के पहले अमेरिकी कांग्रेस ये चेतावनी दे चुकी है कि रूस और चीन हाइपरसोनिक मिसाइलें बना रहे हैं, जिनका सुराग पाना और जिन्हें रास्ते में ही रोक पाना कठिन है। अमेरिकी रक्षा हलकों में ऐसी चर्चा रही है कि अमेरिका अंतरिक्ष में ऐसे सेंसर लगा सकता है, जिससे दुश्मन की मिसाइलों का तुरंत पता लगाया जा सके। लेकिन फिलहाल, अमेरिका के पास कोई सुपरसोनिक हथियार नहीं है, जबकि चीन ने भी इसका सफल परीक्षण कर लिया है।

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आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस ने भी बढ़ाई चिंता

जिस दूसरी तकनीक से पेंटागन चिंतित है, वह आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) है। युद्ध और सैनिक हथियारों के मामले में एआई के इस्तेमाल की संभावना अभी भी आरंभिक विचार-विमर्श के दौर में ही है। लेकिन बताया जाता है कि एआई तकनीक का सैन्य इस्तेमाल करने की सबसे महत्त्वाकांक्षी योजना पीएलए ने ही बनाई है।

चीन ने दुनिया का सबसे बड़ा एआई इकोसिस्टम बनाने के लिए जरूरी डाटा, प्रतिभा, अनुसंधान और पूंजी का एक प्रभावशाली तंत्र बना लिया है। सिएटल स्थित एलन इंस्टीट्यूट फॉर आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के एक रिसर्च के मुताबिक एआई के मामले में चीन अपने प्रतिद्वंद्वियों से बहुत आगे निकल गया है।
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पेंटागन की यह है अगली चेतावनी..

पेंटागन ने अगली जो चेतावनी दी है कि वह सेना में बैकचेन टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से संबंधित है। इसी साल अमेजन वेब सर्विसेज, आईबीएम, डेलॉइट और अन्य अमेरिकी कंपनियों ने एक साथ श्वेत पत्र में यह चेतावनी दी कि अमेरिका मिलिटरी बैकचेन की होड़ में रूस और चीन से पिछड़ने का जोखिम नहीं उठा सकता।

इसमें कहा गया कि रूस और चीन ने इस मामले में बड़ी चुनौती पेश कर दी है। रूस ने साइबर खतरे को रोकने के लिए बैकचेन तकनीक की एक प्रयोगशाला बनाई है। गौरतलब है कि साइबर युद्ध के इस दौर में सैन्य बैकचेन को महत्त्वपूर्ण माना जाता है। इस तकनीक के जरिए रक्षा नेटवर्कों को सुरक्षित रखा जा सकता है।

जानकारों के मुताबिक पेंटागन की ताजा रिपोर्ट का संदेश यह है कि भविष्य में जो युद्ध अहम होंगे, उनमें चीन और रूस ने फिलहाल बढ़त बना ली है। अमेरिका ने इस पर तुरंत ध्यान नहीं दिया, तो उसके लिए अपनी महाशक्ति की हैसियत बनाए रखना बेहद मुश्किल हो जाएगा।
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