जिस दूसरी तकनीक से पेंटागन चिंतित है, वह आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) है। युद्ध और सैनिक हथियारों के मामले में एआई के इस्तेमाल की संभावना अभी भी आरंभिक विचार-विमर्श के दौर में ही है। लेकिन बताया जाता है कि एआई तकनीक का सैन्य इस्तेमाल करने की सबसे महत्त्वाकांक्षी योजना पीएलए ने ही बनाई है।
चीन ने दुनिया का सबसे बड़ा एआई इकोसिस्टम बनाने के लिए जरूरी डाटा, प्रतिभा, अनुसंधान और पूंजी का एक प्रभावशाली तंत्र बना लिया है। सिएटल स्थित एलन इंस्टीट्यूट फॉर आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के एक रिसर्च के मुताबिक एआई के मामले में चीन अपने प्रतिद्वंद्वियों से बहुत आगे निकल गया है।
पेंटागन ने अगली जो चेतावनी दी है कि वह सेना में बैकचेन टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से संबंधित है। इसी साल अमेजन वेब सर्विसेज, आईबीएम, डेलॉइट और अन्य अमेरिकी कंपनियों ने एक साथ श्वेत पत्र में यह चेतावनी दी कि अमेरिका मिलिटरी बैकचेन की होड़ में रूस और चीन से पिछड़ने का जोखिम नहीं उठा सकता।
इसमें कहा गया कि रूस और चीन ने इस मामले में बड़ी चुनौती पेश कर दी है। रूस ने साइबर खतरे को रोकने के लिए बैकचेन तकनीक की एक प्रयोगशाला बनाई है। गौरतलब है कि साइबर युद्ध के इस दौर में सैन्य बैकचेन को महत्त्वपूर्ण माना जाता है। इस तकनीक के जरिए रक्षा नेटवर्कों को सुरक्षित रखा जा सकता है।
जानकारों के मुताबिक पेंटागन की ताजा रिपोर्ट का संदेश यह है कि भविष्य में जो युद्ध अहम होंगे, उनमें चीन और रूस ने फिलहाल बढ़त बना ली है। अमेरिका ने इस पर तुरंत ध्यान नहीं दिया, तो उसके लिए अपनी महाशक्ति की हैसियत बनाए रखना बेहद मुश्किल हो जाएगा।