प्रतिनिधि सभा की पहली बैठक में प्रचंड ने कहा, मैं न केवल विश्वास मत प्राप्त करने के लिए आश्वस्त हूं, मुझे विश्वास है कि विश्वास मत पर पूरा सदन एकजुट होगा।
नेपाल में संसद का पहला सत्र सोमवार को शुरू हो गया। विश्वास मत पर मंगलवार को मतदान हो सकता है। सत्र के पहले दिन नेपाल के नव निर्वाचित प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ ने कहा, देश की समृद्धि के लिए सामूहिक प्रयास की जरूरत है। उन्होंने भरोसा जताया कि नई संसद सफलतापूर्वक जनता की उम्मीदें पूरा करेगी।
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नवंबर में हुए आम चुनावों के बाद प्रतिनिधि सभा की पहली बैठक में प्रचंड ने कहा, मैं न केवल विश्वास मत प्राप्त करने के लिए आश्वस्त हूं, मुझे विश्वास है कि विश्वास मत पर पूरा सदन एकजुट होगा। सीपीएन-माओवादी केंद्र के नेता 68 वर्षीय प्रचंड ने पिछले साल 26 दिसंबर को तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी।
उन्होंने नाटकीय ढंग से नेपाली कांग्रेस के नेतृत्व वाले चुनाव पूर्व गठबंधन से बाहर निकलकर विपक्ष के नेता केपी शर्मा ओली के साथ हाथ मिलाया था। उन्हें 169 सदस्यों के समर्थन से संविधान के अनुच्छेद 76 खंड 2 के अनुसार प्रधानमंत्री चुना गया था। इस प्रणाली से चुने गए प्रधानमंत्री को 30 दिन के भीतर विश्वास मत हासिल करना होता है। एजेंसी
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स्पष्ट बहुमत के लिए प्रचंड को 138 मतों की जरूरत
प्रचंड को सदन में स्पष्ट बहुमत के लिए 138 मतों की जरूरत है। उन्हें ओली की कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल-यूनिफाइड मार्क्सिस्ट-लेनिनिस्ट (सीपीएन-यूएमएल) और नवगठित राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपीप) समेत सात पार्टियों का समर्थन प्राप्त है। राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी के सामने सरकार बनाने के लिए पेश किए गए दावे के मुताबिक 169 सांसदों का समर्थन है। विश्वास मत के बाद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। सांविधानिक प्रावधानों के अनुसार, पहली संसदीय बैठक के 15 दिनों के भीतर अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव हो जाना चाहिए।