जर्मनी में बाल कल्याण अधिकारों को संविधान में शामिल करने पर विचार
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जर्मनी में ज्यादातर बच्चे अपने माता पिता को छोड़कर सरकारी संरक्षण केंद्रों में जा रहे हैं, जिसके बाद जर्मनी में बाल कल्याण अधिकारों को संविधान में शामिल करने की मांग तेज हो गई है। जर्मनी के युवा कल्याण विभाग ने इसे रोकने के लिए 49,000 बार कदम उठाए हैं लेकिन हालात सामान्य नहीं हुए हैं।
युवा कल्याण विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी संरक्षण में गए कुल बच्चों में से 17 फीसदी बच्चे बिना माता-पिता के जर्मनी आए शरणार्थी हैं। 14 फीसदी ऐसे बच्चे हैं, जिन्हें उनके परिवार से देखभाल नहीं मिली, इसके अलावा 12 फीसदी बच्चे घर वालों के साथ बिगड़े संबंध होने की वजह से संरक्षण में आए।
वहीं 12 फीसदी बच्चे घरों में पड़ने वाली मार और पिटाई की वजह से सरकारी संरक्षण में आए। इनमें से करीब 20 फीसदी बच्चों में युवा कल्याण अधिकारियों से मदद की मांग की थी। रिपोर्ट में यह भी खुलासा किया गया था कि सरकारी संरक्षण में आने वाला हर तीसरे बच्चे की उम्र 12 साल से कम थी और हर दसवें बच्चे की उम्र तीन साल से कम थी।
रिपोर्ट में बताया गया कि ज्यादातर बच्चे माता-पिता या इनमें से एक या दोनों की ओर से अपनी जिम्मेदारी ना उठा पाने की वजह सरकारी संरक्षण का रुख करते थे। फोरसा सर्वे ने पिछले महीने 10,000 लोगों से इस बारे में सवाल किए थे। इसमें शामिल 71 फीसदी लोगों ने कहा बाल कल्याण अधिकारों को संविधान में शामिल किया जाना चाहिए।
ऐसा करने से बच्चों के कल्याण पर राजनैतिक ध्यान ज्यादा दिया जा सकेगा। इस सर्वे के बाद जर्मनी के कानून मंत्री ने भी बच्चों को अधिकार दिलाने की मांग तेज कर दी है। अब जर्मन सरकार बाल-युवा कल्याण कानून में संशोधन पर विचार कर रही है।नए कानून को लागू करने में 15 करोड़ रुपये का खर्च आएगा और इसे तैयार करने के लिए 5,400 वैज्ञानिकों से चर्चा की गई है।