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Panama: पनामा ने अमेरिका से निर्वासित प्रवासियों को किया रिहा, मानवाधिकार संगठनों ने की थी आलोचना

Sun, 09 Mar 2025 04:45 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, पनामा सिटी।

सार

Panama: पनामा सरकार ने अमेरिका से निर्वासित किए गए दर्जनों प्रवासियों को रिहा कर दिया, लेकिन उन्हें 30 दिनों के अंदर देश छोड़ने का आदेश दिया है, जिससे उनकी कानूनी समस्याएं बढ़ गई हैं।  
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
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पनामा सरकार ने शनिवार को उन प्रवासियों को रिहा कर दिया, जिन्हें अमेरिका से निर्वासित करने के बाद कुछ हफ्तों तक दूरदराज के शिविर में रखा गया था। उन्हें बताया गया कि उनके पास मध्य अमेरिकी देश को छोड़ने के लिए एक महीने का समय है। हफ्तों तक चले मुकदमों और मानवाधिकार उल्लंघन को लेकर आलोचनाओं के बाद पनामा सरकार ने यह कदम उठाया है। लेकिन इस कदम के बाद अब इन प्रवासियों की कानूनी समस्याएं बढ़ गई हैं। 

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हयातुल्लाह ओमाघ 2022 में अफगानिस्तान के तालिबान के नियमंत्रण में आने के बाद भागकर पनामा पहुंचे थे। वह कहते हैं, 'हम शरणार्थी हैं। हमारे पास पैसे नहीं है। पनामा सिटी में होटल में रहने के लिए हमारे पास पैसा नहीं हैं औ न ही हमारे रिश्तेदार हैं। मैं किसी भी हालत में अफगानिस्तान नहीं लौट सकता, क्योंकि तालिबान मुझे मारना चाहता है। मैं कैसे लौट सकता हूं?'

पनामा के अधिकारियों ने कहा कि निर्वासित लोग अपनी ठहरने की अवधि साठ दिन तक बढ़ा सकते हैं, लेकिन इसके बाद उनकी स्थिति स्पष्ट नहीं है। ओमाघ जैसे कई प्रवासी यह नहीं जानते कि उन्हें आगे क्या करना है। कुछ महीने पहले पनामा और कोस्टा रिका ने अमेरिका के ट्रंप प्रशासन के साथ एक समझौता किया था, जिसके तहत पनामा ने अमेरिका से निर्वासित किए गए प्रवासियों को अस्थायी शरण देने की बात की स्वीकार किया था। हालांकि, मानवाधिकार संगठनों ने इस समझौते की आलोचना की थी और कहा था कि अमेरिका अपनी जिम्मेदारी से बच रहा है। 
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रिहा किए गए प्रवासियों में पाकिस्तान, ईरान, अफगानिस्तान, रूस, नेपाल और अन्य देशों के लोग शामिल हैं, जो हिंसा और उत्पीड़न से बचने के लिए भागकर आए। इनमें से कई ने फिर से अमेरिका जाने की योजना बनाई है, क्योंकि उनके पास कोई और विकल्प नहीं है। ओमाघ ने कहा, मुझे पनामा में शरण लेने का मौका नहीं मिला, क्योंकि पनामा में शरण स्वीकार नहीं की जाती। इस मुद्दे पर मानवाधिकार संगठनों और वकीलों ने पनामा और कोस्टा रिका की आलोचना करते हुए कहा था कि ये देश प्रवासियों के काले धब्बे बन गए हैं, जहां उनके पास कोई सहायता या संसाधन नहीं हैं।
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