अमेरिका ने मध्य अमेरिकी नहर का निर्माण, स्वामित्व और संचालन तब तक किया, जब तक कि अमेरिकी राष्ट्रपति जिमी कार्टर ने 1970 के दशक में एक समझौता नहीं किया था। इसके तहत धीरे-धीरे महत्वपूर्ण जलमार्ग का नियंत्रण पनामा के अधिकारियों को सौंप दिया गया।
पनामा नहर से गुजरने वाले अमेरिकी जहाजों को तरजीही सुविधा देने की डोनाल्ड ट्रंप की मांग को लेकर जलमार्ग को चलाने वाले प्राधिकरण के प्रमुख ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि अगर हम इस मांग को मान लेते हैं तो इसस अराजकता बढ़ेगी। पनामा नहर प्राधिकरण के सीईओ रिकुअर्टे वास्केज मोरालेस ने कहा कि नियम तो नियम होते हैं। इसमें कोई अपवाद नहीं है। उन्होंने कहा कि हम चीनी या अमेरिकी या किसी और के लिए भेदभाव नहीं कर सकते। यह तटस्थता संधि, अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करेगा और इससे अराजकता पैदा होगी।
विज्ञापन
जिमी कार्टर के समझौते से बदली कहानी
अमेरिका ने मध्य अमेरिकी नहर का निर्माण, स्वामित्व और संचालन तब तक किया, जब तक कि अमेरिकी राष्ट्रपति जिमी कार्टर ने 1970 के दशक में एक समझौता नहीं किया था। इसके तहत धीरे-धीरे महत्वपूर्ण जलमार्ग का नियंत्रण पनामा के अधिकारियों को सौंप दिया गया।
ट्र्रंप ने बोला तीखा हमला
अब अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति ट्रंप ने इस समझौते के खिलाफ बोलना शुरू कर दिया है। मंगलवार को उन्होंने इसे खत्म करने के लिए सैन्य कार्रवाई का उपयोग करने से इनकार कर दिया। हालांकि, रिपब्लिकन नेता ने ग्रीनलैंड पर कब्जा करने और पड़ोसी कनाडा के खिलाफ आर्थिक बल के इस्तेमाल की धमकी दी। पनामा नहर को लेकर ट्रंप काफी तीखे बोल बोल रहे हैं। उनकी सबसे तीखी आलोचनाओं में से एक यह है कि इसे चीन प्रभावी रूप से नियंत्रित कर रहा है।
विज्ञापन
वास्केज ने किया खंडन
हालांकि, वास्केज मोरालेस ने इसे निराधार बताया। उन्होंने बताया कि हमारे संचालन में चीन की कोई भी भागीदारी नहीं है। एक तथ्य यह भी है कि एक चीनी कंपनी नहर के दोनों छोर पर दो बंदरगाहों का संचालन करती है। नहर खुद पनामा नहर प्राधिकरण द्वारा संचालित की जाती है।
'किसी और की तुलना में अधिक शुल्क नहीं लेता'
वास्केज ने जोर देकर कहा कि पनामा नहर प्राधिकरण अमेरिकी जहाजों से किसी और की तुलना में अधिक शुल्क नहीं लेता है। उन्होंने कहा कि इसके नियमों का एकमात्र अपवाद यह है कि 1970 के दशक में किए गए समझौते के तहत अमेरिकी नौसेना के जहाजों को प्राथमिकता दी जाती है, जिससे उन्हें अटलांटिक और प्रशांत महासागरों के बीच तेजी से यात्रा करने की सहूलियत मिलती है।