इस्राइल और हमास के बीच रविवार को युद्धविराम समझौता लागू हो चुका है। समझौता लागू होने के बाद, भारत में फलस्तीन दूतावास के प्रभारी अबेद एलराजेग अबू जाजर ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस समझौते के सभी पहलुओं को लागू करने की अपील की। इसके साथ ही, जाजर ने युद्धग्रस्त गाजा के पुनर्निर्माण में भारत से सहायता की भी मांग की।
अबू जाजर ने कहा कि इस समझौते में कई तकनीकी विवरण शामिल हैं, जो जटिल और चुनौतीपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि इसके लिए न केवल ट्रंप प्रशासन या संयुक्त राष्ट्र, बल्कि दुनिया के सभी शक्तिशाली देशों का सहयोग जरूरी है। उन्होंने कहा, 'हम अंतरराष्ट्रीय समुदाय से युद्धविराम समझौते में हर विवरण के कार्यान्वयन को सुनिश्चित कराने की अपील करते हैं।'
भारत के पास मानवीय सहायता देने का अनुभव: अबू जाजर
युद्धग्रस्त गाजा में पुनर्निर्माण कार्य में भारत की सहायता मांगते हुए, अबू जाजर ने कहा कि भारत हमेशा मानवीय सहायता देने में आगे रहा है और कई अलग-अलग जगहों पर मानवीय सहायता देता रहा है। उन्होंने कहा कि भारत के पास अनुभव है। हमारा मानना है कि फलस्तीनियों के रूप में हमारे उद्देश्य और गाजा के लोगों के लिए मानवीय और राजनीतिक प्रयासों में भारती की महत्वपूर्ण भूमिका है। फलस्तीनी दूत ने कहा कि मदद चिकित्सा, अस्पताल, स्कूल और खाद्य सामग्री के रूप में हो सकती है।
15 महीने के संघर् के बाद हुआ युद्धविराम समझौता
बात दें कि इस्राइल और हमास के बीच युद्धविराम और बंधक-मुक्ति समझौता 15 महीने के संघर्ष के बाद हुआ, जो सात अक्तूबर, 2023 को हमास द्वारा इस्राइल पर किए गए हमले से शुरू हुआ था। इस समझौते से गाजा में चल रहे युद्ध को रोकने और हमास द्वारा पकड़े गए इस्राइली बंधकों की रिहाई की उम्मीद है।
अगले छह सप्ताह में शुरू होगा समझौते का पहला चरण
युद्धविराम समझौते की मध्यस्थता कतर, मिस्र और अमेरिका द्वारा की जा रही है, और इसका पहला चरण अगले छह सप्ताह में शुरू होगा। इस चरण में 700 से अधिक फलस्तीनी कैदियों को रिहा किया जाएगा, जिनमें से कई 40 वर्षों से अधिक समय से इस्राइली जेलों में बंद हैं। इस समझौते के अगले दो चरणों में अधिक बंधकों की रिहाई और गाजा के पुनर्निर्माण पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। वहीं, फलस्तीनी दूत ने दावा किया है कि फिलहाल, इस्राइली जेलों में 5,000 से ज्यादा फलस्तीनी बंद हैं।
अबू जाजर ने स्थायी शांति की संभावनाओं पर जताया संदेह
हालांकि, फलस्तीनी दूत अबू जाजर ने क्षेत्र में स्थायी शांति की संभावनाओं पर संदेह व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह समस्या केवल गाजा तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे फलस्तीनी क्षेत्रों में इस्राइल की नीतियों का प्रभाव है। उन्होंने कहा कि बिना राजनीतिक समाधान के, कोई भी उपाय महत्वहीन होगा।
रूवेन अजार ने इस्राइल का समर्थन करने के लिए भारत को धन्यवाद दिया
इससे पहले, भारत में इस्राइली राजदूत रूवेन अजार ने कहा कि युद्धविराम समझौता इस्राइली बंधकों की वापसी में मदद कर सकता है और यह सुनिश्चित कर सकता है कि हमास फिर से ऐसे हमले न करे। उन्होंने भारत सरकार को अपने देश की आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन करने के लिए धन्यवाद भी दिया।
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