अमेरिका में पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रों के साथ भेदभाव का एक मामला अब अंतरराष्ट्रीय बहस का विषय बन गया है। भारतीय पीएचडी छात्र आदित्य प्रकाश और उर्मि भट्टाचार्य ने अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ़ कोलोराडो बोल्डर के खिलाफ नस्लीय भेदभाव और प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए कानूनी लड़ाई लड़ी। यह मामला एक साधारण से दिखने वाले लंच विवाद से शुरू हुआ, लेकिन आखिरकार 1.8 करोड़ रुपये के नागरिक अधिकार समझौते पर जाकर खत्म हुआ।
भारत वापसी और सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया
समझौते के बाद यह दंपत्ती भारत लौट आया। उर्मि भट्टाचार्य ने इंस्टाग्राम पर अपनी पीड़ा साझा करते हुए लिखा कि यह लड़ाई सिर्फ खाने की आजादी की नहीं थी, बल्कि सम्मान और आत्मसम्मान की भी थी। उन्होंने कहा कि इस दौरान उन्हें मानसिक और शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ा, लेकिन वह अन्याय के सामने झुकने वाली नहीं हैं। सोशल मीडिया पर इस फैसले का जोरदार स्वागत हुआ। कई लोगों ने इसे सही तरीके से आवाज उठाने की मिसाल बताया, तो कुछ ने मजाकिया अंदाज में कहा कि वे इस जीत का जश्न और ज्यादा पालक पनीर खाकर मनाएंगे।
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