कोरोना महामारी के बीच टीकाकरण में पाकिस्तान सबसे पीछे है। यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड द्वारा किए गए आकलन के अनुसार, यहां प्रति 100 व्यक्ति पर एक को टीका लगा है।
पड़ोसी देश में प्रति 100 में एक तो भारत में 11 लोगों को मिल रहा टीका
रिपोर्ट के अनुसार, शिसेल्स पहले, इजराइल दूसरे जबकि संयुक्त अरब अमीरात दुनिया भर में तीसरे नंबर पर है। भारत में प्रति व्यक्ति पर 11 लोगों को ही टीका लगा है। द न्यूज इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार, मालदीव में प्रति 100 व्यक्ति पर टीके की 73, चीन में 17, नेपाल में 7, बांग्लादेश में 5.2, श्रीलंका में 4.2, ईरान में 1.1 और अफगानिस्तान में 0.6 लोगों को टीके की एक खुराक लगी है।
आंकड़ों के अनुसार दुनिया भर में अब तक टीके की 180 करोड़ खुराक लग चुकी है जो प्रति 100 पर 14 डोज के बराबर है। 83 फीसदी टीका उच्च व उच्च मध्यम आय वाले देशों के लोगों को दिया गया है। सिर्फ 0.2 फीसदी टीके की खुराक कम आय वाले देशों के लोगों को दी गई है। अफ्रीका दुनिया का एकमात्र द्वीप है जहां टीकाकरण की रफ्तार सबसे धीमी है।
रूस में मॉल व सिनेमाघरों में भी टीकाकरण
रूस अपने लोगों को कोरोना महामारी की चपेट में आने से बचाने के लिए हर संभव कोशिश कर रहा है। रूस में अस्पतालों, क्लीनिक के साथ मॉल, फूड कोर्ट और सिनेमाघरों तक में लोगों को टीका लग रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि जिसको जहां सुविधा हो, वहां पर टीका लगवाएं। ताकि महामारी को फैलने से रोका जा सके। रूस की सरकार की कोशिश है कि 14.6 करोड़ लोगों में से तीन करोड़ लोगों को जून के मध्य तक टीका लगाना है। इसके बाद 6.9 करोड़ लोगों को अगस्त तक टीका लगाने का लक्ष्य रखा गया है।
टीके का उत्पादन बढ़ाने के लिए चीन की मदद लेगा रूस
रूस चीन की फार्मा कंपनियों के साथ मिलकर अपने स्पूतनिक-5 टीके का उत्पादन बढ़ाएगा। रूस ने कहा है कि उसने टीके का निर्माण करने वाली तीन कंपनियों से टीके की 2.6 करोड़ डोज के उत्पादन का करार किया है। रूस का दावा है कि वह 63 करोड़ टीके की खुराक दुनिया भर के 100 देशों को मुहैया कराएगा।
चीन भी टीके की आपूर्ति को लेकर परेशान
चीन दुनिया के 30 देशों को टीका मुहैया करा रहा है। अब चीन के सामने भी टीके की आपूर्ति बड़ी चुनौती बन गई है। न्यूयॉर्क स्थित काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशन्स में ग्लोबल हेल्थ के सीनियर फेलो यानझोंग हुआंग ने कहा कि चीन भी इतना टीके का उत्पादन नहीं कर रहा है जिससे वे वह अन्य देशों के साथ घरेलू जरूरतों को पूरा कर सके।