पाकिस्तान सरकार आतंकवादियों पर काबू करने के कितने भी दावे क्यों न कर ले लेकिन उसके दावे तब झूठे साबित हो जाते हैं जब तालिबानी आतंकवादी महिलाओं और बच्चों को खुले आम धमकी देते हैं।
दरअसल, पाकिस्तानी सरकार द्वारा जनजातीय क्षेत्रों में उसकी सफलताओं के दावे के बावजूद, पूर्व फेडरली प्रशासित जनजातीय क्षेत्र, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान का प्रमुख ठिकाना बना हुआ है। अब वे सीधे तौर पर महिलाओं और बच्चों को धमकी दे रहे हैं।
2014 में ऑपरेशन जर्ब-ए-अजब के कारण आतंकवादी संगठन में गिरावट आई थी लेकिन हाल के दिनों में फिर से इनकी मौजूदगी सामने आई है। द डिप्लोमैट के लिए काम कर रहे कुंवर खुलदून शाहिद के अनुसार, टीटीपी से संबंधित रिपोर्टों पर निगरानी रखी जा रही है।
शाहिद ने हाल ही में फैसलाबाद और गुजरांवाला सहित पाकिस्तान के विभिन्न आबादी वाले शहरों से गिरफ्तार किए गए टीटीपी गुर्गों के बोरे में रिपोर्ट भी दी थी।
टीटीपी ने मीरनशाह के निवासियों को संगीत सुनने पर रोक लगाने की मांग की थी और एक पुरुष साथी और एक महिला को बाहर जाने पर भी रोक लगाने की मांग की थी साथ ही पोलियो टीकाकरण पर भी प्रतिबंध लगाया था।
टीटीपी ने अपने जारी संदेश में कहा, हम आपको याद दिलाते हैं कि तालिबान द्वारा पूर्व में कई बयान जारी किए गए हैं लेकिन इस बार हम तालिबान के आदेश का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई करेंगे। उन्होंने कहा डीजे का कोई उपयोग नहीं होगा, न तो घर के अंदर और न ही खुले खेतों में और चेतावनी की अनदेखी करने वाले लोग परिणामों के लिए जिम्मेदार होंगे।
आतंकी संगठन ने स्वास्थ्य कर्मचारियों को बच्चों को पोलियो की दवा पिलाने के खिलाफ भी चेतावनी दी है। यह पाकिस्तान के लिए बुरी खबर है, क्योंकि पाकिस्तान द्वारा पोलियोमुक्त होने की पूरी कोशिश की जा रही है। लेकिन स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस साल अकेले कम से कम 72 लोगों को संक्रामक बीमारी का पता चला है।
इन सब धमकियों के बावजूद पाकिस्तान सरकार इस समस्या पर ध्यान नहीं दे पा रही है।