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पाकिस्तान में कड़ी सुरक्षा के बीच दफनाया गया करीमा बलोच का शव, मोदी को कहती थीं भाई

Tue, 26 Jan 2021 01:11 AM IST
गौरव पाण्डेय पीटीआई, इस्लामाबाद
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करीमा बलोच (फाइल फोटो) - फोटो : social media
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पाकिस्तान सरकार की आलोचक, महिलाओं के अधिकारों के लिए लड़ने वाली कार्यकर्ता और बलूच समुदाय की 37 वर्षीय नेता करीमा बलोच के शव को बलूचिस्तान प्रांत में स्थित उनके गांव लाकर कड़ी सुरक्षा के बीच दफनाया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भाई कहने वाली करीमा बलोच की 22 दिसंबर को कनाडा के टोरंटो में संदिग्ध परिस्थितिों में मौत हो गई थी। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।

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2016 से कनाडा में निर्वासन का जीवन जी रहीं करीमा पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियों की मुखर आलोचक थीं और उन्हें लोगों के गायब होने तथा बलूचिस्तान प्रांत में मानवाधिकारों के उल्लंघन पर आवाज उठाने के लिए जाना जाता था। करीमा को कीच क्षेत्र के टुम्प गांव में रविवार को सुपर्दे खाक करने के दौरान उनके नजदीकी रिश्तेदार मौजूद थे। बलूच राष्ट्रवादियों द्वारा विरोध की आशंका के चलते सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई थी।

करीमा के समर्थकों ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि गांव को सील कर दिया गया था ताकि अन्य क्षेत्रों से लोग करीमा के अंतिम दर्शन करने न पहुंच सकें। सुरक्षा सूत्रों ने बताया कि क्षेत्र में किसी अप्रिय घटना को रोकने के लिए मोबाइल सेवा निलंबित कर दी गई थी। उल्लेखनीय है कि टोरंटो पुलिस ने करीमा की मौत को संदेहास्पद नहीं बताया है, हालांकि कुछ समर्थकों का मानना है कि करीमा की हत्या की गई है।
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करीमा, पाक सुरक्षा संस्थानों की मुखर आलोचक थीं। उनका आरोप था कि पाक सरकार बलूचिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों का दोहन कर रही है और वहां के निवासियों को इससे वंचित रखना चाहती है। करीमा ने बलूचिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघन और लोगों के गायब होने के विषय पर पाकिस्तानी सरकार के खिलाफ अभियान चलाया था। उन्हें 2016 में बीबीसी की सौ प्रेरक महिलाओं की सूची में शामिल किया गया था।

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