बलूचिस्तान में आम लोगों के खिलाफ हिंसा की घटनाएं लगातार जारी हैं। मानवाधिकार संगठनों ने शुक्रवार को दावा किया कि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने दो और नागरिकों की गैर-न्यायिक हत्या कर दी है। जबकि छह अन्य लोगों को जबरन गायब कर दिया गया है।
बलोच यकजेहती कमेटी ने क्या बताया?
मानवाधिकार संगठन बलोच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) के अनुसार, 19 वर्षीय किसान शबीर अहमद का गोलियों से छलनी शव आठ जून को वाशुक जिले के बसीमा इलाके में मिला। वह एक महीने से अधिक समय से लापता था।
बीवाईसी ने बताया कि शबीर को 27 अप्रैल को कथित तौर पर जबरन उठाया गया था। उसके परिवार को उसकी स्थिति या ठिकाने के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई थी। संगठन ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि यह बलूचिस्तान में जबरन गायब किए जाने और बाद में शव मिलने की लगातार सामने आ रही घटनाओं का हिस्सा है।
एक अन्य मामले में, पुलिस कांस्टेबल शाह हुसैन (26 वर्षीय) की पिछले महीने पंजगुर जिले के तस्प इलाके में कथित तौर पर हत्या कर दी गई। बीवाईसी के अनुसार, शाह को 29 अक्तूबर 2025 को जबरन गायब किया गया था। बाद में तीन नवंबर को रिहा किया गया था। संगठन का आरोप है कि इस दौरान उन्हें अवैध हिरासत में रखकर प्रताड़ित किया गया।
बीवाईसी ने कहा कि अगर एक सरकारी कर्मचारी भी इस तरह की घटनाओं का शिकार हो सकता है, तो आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
ये भी पढ़ें:
पाकिस्तान की मध्यस्थता में शांति समझौता अंतिम चरण में, ईरान के विदेश मंत्री का दावा
बलोच वॉयस फॉर जस्टिस ने क्या आरोप लगाए?
मानवाधिकार संगठन बलोच वॉयस फॉर जस्टिस (बीवीजे) ने भी आरोप लगाया कि पाकिस्तानी बलों ने बलूचिस्तान में छह नागरिकों को जबरन गायब कर दिया है। इन लोगों की पहचान सरदारजादा मीर जेहरी खान मोसियानी, मीर दोस्त मोहम्मद मोसियानी, मीर इरशाद अहमद मोसियानी, मीर उम्मीद अली मोसियानी, मीर शकर खान मोसियानी और मीर सनाउल्लाह मोसियानी के रूप में की गई है।
बीवीजे ने कहा कि बलूचिस्तान में जबरन गायब किए जाने की घटनाओं से प्रभावित परिवार लंबे समय से अपने प्रियजनों की तलाश में भटक रहे हैं। संगठन ने मांग की कि इन मामलों के लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाए और मानवाधिकारों का सम्मान किया जाए।