पाकिस्तान की विशेष अदालत ने शहबाज शरीफ की गिरफ्तारी से पहले की जमानत रद्द करने की याचिका सोमवार को खारिज कर दी। 14 अरब डॉलर के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में यह याचिका संघीय जांच एजेंसी (एफआईए) ने दाखिल की थी। शहबाज शरीफ इमरान खान के बाद प्रधानमंत्री पद के दावेदार हैं। इस दौरान अदालत ने शहबाज शरीफ और अन्य संदिग्धों को 11 अप्रैल को नामजद करने के लिए कहा।
अदालत का इस फैसले से प्रधानमंत्री इमरान खान को एक झटका लगा है। इमरान खान नेशनल असेंबली के विघटन के कारण पाकिस्तान में चल रहे संवैधानिक संकट के बीच शहबाज को सलाखों के पीछे देखना चाहते थे।
पीएमएल-एन के अध्यक्ष और नेशनल असेंबली में विपक्ष के नेता शहबाज लाहौर में सोमवार को एफआईए की विशेष अदालत के समक्ष पेश नहीं हुए। उन्होंने बर्खास्तगी को चुनौती देने वाली विपक्षी पार्टियों की याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पेश होने से छूट मांगी थी। हालांकि उनका बेटा हमजा अदालत में पेश हुआ।
शहबाज के वकील एडवोकेट अमजद परवेज ने अदालत को बताया कि एफआईए ने विपक्षी नेता की जमानत को केवल प्रधान मंत्री खान को खुश करने के लिए चुनौती दी थी।इस पर एफआईए के एक अधिकारी ने अदालत से अपना जमानत आदेश वापस लेने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि शहबाज जमानत की रियायत का दुरुपयोग कर रहे हैं।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जज एजाज हसन अवान ने एफआईए की याचिका खारिज कर दी। अदालत ने शहबाज और उनके बेटे हमजा की जमानत 11 अप्रैल तक के लिए बढ़ा दी। जज ने 11 अप्रैल को अगली सुनवाई पर मामले में संदिग्धों को नामजद करने की भी घोषणा की।
एफआईए ने शहबाज और उसके बेटों हमजा और सुलेमान के खिलाफ पाकिस्तान दंड संहिता की धारा 419, 420, 468, 471, 34 और 109 (वित्तीय धोखाधड़ी, प्रतिरूपण और जालसाजी) और धारा 5 (2) और 5 (3) (आपराधिक कदाचार) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और धन शोधन रोधी अधिनियम की धारा 3/4 के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी। शहबाज खान ने इस मामले को राजनीति से प्रेरित करार दिया है।