राष्ट्रपति जरदारी के खिलाफ स्विट्जरलैंड में भ्रष्टाचार के मामले दोबारा खोलने के भारी दबाव में, पाक सरकार ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में उस पत्र का मसौदा पेश किया, जिसे वह स्विस सरकार को लिखेगी, ताकि वहां उनके खिलाफ मुकदमा चलने का रास्ता साफ हो सके। कानून मंत्री फारूख एच नाइक ने आसिफ सईद खोसा की अध्यक्षता वाली शीर्ष अदालत की पांच सदस्यीय पीठ के सामने यह मसौदा पेश किया।
मसौदे को पढ़ने के बाद जजों ने इस पर कुछ आपत्ति जताई और मामले की सुनवाई बुधवार (आज) तक के लिए टाल दी। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री रजा परवेज अशरफ ने पिछले सप्ताह अदालत को बताया था कि उनकी सरकार ने स्विस अधिकारियों को इससे पहले लिखे खत को वापस लेने का निर्णय लिया है, जिसमें जरदारी के खिलाफ वहां चल रहे भ्रष्टाचार के मामलों को बंद करने के लिए कहा गया था। अशरफ ने अदालत को इस बात का आश्वासन दिया था कि वह कानून मंत्री को इसके क्रियान्वयन के लिए अधिकृत करेंगे।
एक सप्ताह के अवकाश के बाद जब कल मामले की सुनवाई शुरू हुई तो नाइक ने अशरफ की ओर से पाक प्रशासन द्वारा स्विस अधिकारियों को लिखे जाने वाले खत का मसौदा पेश किया। जजों ने मसौदे को पढ़ने के लिए अदालत की सुनवाई 15 मिनट के लिए स्थगित कर दी। इसके बाद उन्होंने कानून मंत्री और सरकार के वकील को परामर्श के लिए कोर्ट चैंबर के भीतर बुलाया।
अदालत ने उनसे कहा कि जजों ने खत के मसौदे को पढ़ा है और कुछ विचार विमर्श भी किया है। इसपर कानून मंत्री ने बाद में कहा कि जजों ने खत के मसौदे में शामिल जिन बिंदुओं पर सवाल किया है, उस पर सरकार से परामर्श किया जाएगा। उन्होंने इसके लिए सरकार से एक दिन का वक्त मांगा, जिसे अदालत ने मानते हुए सुनवाई को आज तक के लिए टाल दिया।
मालूम हो कि जरदारी के खिलाफ मामले बंद करने का खत तत्कालीन अटार्नी जनरल मलिक कयूम ने 22 मई 2008 को लिखा था, उन्होंने स्विस अधिकारियों ने कहा था कि पाक सरकार जरदारी और उनकी पत्नी व पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो के खिलाफ मुकदमे को आगे बढ़ाने के पक्ष में नहीं है।