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पाकिस्तान की पुलिस पर हमला करने की थी बिल लादेन की साजिश

Fri, 04 Mar 2016 03:14 PM IST
हारून रशीद/बीबीसी उर्दू संवाददाता, इस्लामाबाद

सार

  • पाकिस्तानी सुरक्षा बल तैनात हैं उन पर भी हमले होने चाहिए
  • 'पाकिस्तान में जिहाद क्यों और कब?' 
  • अफगानिस्तान में इस्लामी राज्य की स्थापना करने की कोशिश करनी चाहिए
  • कराची में सिंगापुर या हांगकांग जैसी हुकूमत की स्थापना
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ओसामा बिन लादेन - फोटो : Reuters
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विस्तार
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पाकिस्तान के एबटाबाद में मारे जाने वाले अल कायदा नेता ओसामा बिन लादेन चाहते थे कि चरमपंथी पाकिस्तान के पश्चिमी इलाक़ो के साथ-साथ उसकी पूर्वी सीमा पर भी हमले करके उसे कमज़ोर करें। लादेन चाहते थे कि खैबर पख्तनख्वा और बलूचिस्तान में जो पाकिस्तानी सुरक्षा बल तैनात हैं उन पर भी हमले होने चाहिए।
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अमेरिकी खुफिया एजेंसी डायरेक्टोरेट ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस ने ओसामा बिन लादेन के एबटाबाद निवास से मिलने वाले दस्तावेजों को जारी किया है। अंग्रेजी में जारी किए गए 100 से अधिक पन्नों के दस्तावेजों में पाकिस्तान में जिहाद और पाकिस्तानी तालिबान के पुनर्गठन से जुड़े दो दस्तावेज अहम हैं।

दोनों लगभग 30 पन्नों के हैं और उनसे यह भी साबित होता है कि एबटाबाद में मौजूद होने के बावजूद वे न सिर्फ अल क़ायदा बल्कि तहरीके तालिबान पाकिस्तान की नीतियों और प्रशासनिक मामलों में भी बहुत हद तक दखल रखते थे। 'पाकिस्तान में जिहाद क्यों और कब?'
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शीर्षक से एक लेख भी समाने आया है। इसमें बताया गया है कि अगर पंजाब (पाकिस्तान) में माहौल खराब किया जाए और सेना को वहां आने पर मजबूर किया जाए तो यह एक बड़ी कामयाबी होगी, क्योंकि फौज पंजाब में रहने को मजबूर होगी और सीमा से उसका ध्यान हट जाएगा।

ओसामा पाकिस्तानी सेना की ताकत को पश्चिमी और पूर्वी क्षेत्रों में फंसाकर बांट देने के समर्थक थे। साल 2009 और 2011 के बीच तैयार किए गए इस लेख में ओसामा दलील देते हैं कि चरमपंथियों को पहले अफगानिस्तान में इस्लामी राज्य की स्थापना करने की कोशिश करनी चाहिए ताकि इसे बाद में दूसरे इलाको में फैलाया जा सके।

लेकिन अफगानिस्तान में इस्लामी हुकूमत के खात्मे के बाद लोग तितर-बितर हो गए चुके थे और ऐसा करना मुश्किल हो गया था। उनके अनुसार पाकिस्तान में जनता और 'मुजाहिदीन' मानसिक रूप से जिहाद के लिए तैयार न थे। तालिबान स्वात में भी हार चुका था।

ओसामा के मुताबिक़ अमरीका पाकिस्तान को विभाजित करना चाहता है और इस बारे में उसने एक विभाजित पाकिस्तान का नक्शा भी तैयार किया हुआ था। उनका मानना था कि इस योजना के तहत वो कराची में सिंगापुर या हांगकांग जैसी हुकूमत की स्थापना, बलूचिस्तान को मुक्त बनाना, उत्तरी क्षेत्रों में हुकूमत, खैबर पख्तूनख्वा को अफगानिस्तान में मिलाने और बाकी पंजाब और सिंध को आजाद मुल्क बनाना या भारत के साथ मिलाना चाहते थे।
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भविष्यवाणी कम से कम सही साबित हुई

ओसामा बिन लादेन - फोटो : BBC
ओसामा की ग्वादर बंदरगाह से संबंधित भविष्यवाणी कम से कम सही साबित हुई है जिसमें उन्होंने इसे चीन के हवाले किए जाने की बात की थी। उस समय की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इन दस्तावेज़ों के मुताबिक ओसामा पाकिस्तान में जिहाद की शुरुआत करने के समर्थक दिखाई देते थे।

उनका कहना था, "आज पाकिस्तान, अफगानिस्तान में इस्लामी हुकूमत और वजीरिस्तान की जिहादी को मजबूत करने के लिए जिहाद ज़रूरी हो गया है।" इस दस्तावेज में पाकिस्तान में ऑपरेशन को अंज़ाम देने का भी विस्तार से वर्णन किया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार उनकी यह सोच पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों की सोच से मिलती जुलती है।

एक पत्र में ओसामा बिन लादेन ने तालिबान पाकिस्तान के संगठन क बारे में विस्तृत चर्चा की है। वो उसमें बताते हैं कि किसे संगठन का मुखिया होना चाहिए, कहां-कहां से लोग इसमें भर्ती करने चाहिए। इसके अलावा वो ये भी जिक्र करते हैं कि वित्त, सूचना और खुफ‌िया समितियों का प्रबंधन कैसे किया जाना चाहिए। पैसे की कमी को पूरा करने के लिए उन्होंने अपहरण की बात भी की है।

वो अहमदिया, हिंदू, प्रमुख शिया व्यापारी, सरकारी अधिकारी और अमेरीकियों की मदद करने वाले लोगों का अपहरण करने की बात करते हैं। हालांकि उन्होंने अग़वा किए गए लोगों के साथ हिंसक बर्ताव नहीं करने की बात भी की थी। इन दस्तावेजों से पता चलता है कि ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान के मामलों पर गहरी नजर रखे हुए थे और चरमपंथियों का मार्गदर्शन भी करते थे।
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