पाकिस्तान ने कहा है कि वह सिंधु नदी जल समझौते में कोई भी बदलाव स्वीकार नहीं करेगा। प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के विशेष सहायक तारिक फातमी ने डॉन न्यूज से कहा,सिंधु नदी जल समझौते के नियमों में किसी भी बदलाव को पाकिस्तान स्वीकार नहीं करेगा।
हमारा रुख समझौते के सिद्धांतों पर आधारित है। इस समझौते का ईमानदारी से सम्मान किया जाना चाहिए। गौरतलब है कि भारत 56 साल पुराने समझौते के क्रियान्वयन के साथ ही द्विपक्षीय मतभेद हल पर जोर दे रहा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने बृहस्पतिवार को कहा था कि इच्छाशक्ति हो तो ऐसी कोई वजह नहीं है कि किशनगंगा जैसी परियोजनाओं की तकनीकी डिजाइन के मापदंडों पर पाकिस्तान की आपत्तियों का दोनों पक्षों के विशेषज्ञ समाधान ना निकाल सकें।
स्वरूप के मुताबिक भारत का मानना है कि इस तरह के विचार-विमर्श को पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए। डॉन की खबर के मुताबिक भारत द्वारा और समय दिए जाने के अनुरोध से पाकिस्तान के कान खड़े हो गए हैं। वर्ष 1960 में हुए इस समझौते में सिंधु नदी घाटी में स्थित तीन पूर्वी नदियों- ब्यास, रावी और सतलुज का नियंत्रण भारत को दिया गया है जबकि तीन पश्चिमी नदियों- सिंधु, चेनाब और झेलम पाकिस्तान को मिलीं।