अहल-ए-सुन्नत वल जमात
नेता-मौलाना मोहम्मद अहमद लुधियानवी
कानूनी स्थिति- प्रतिबंधित- चूंकि आतंकी संगठन लश्कर-ए-झांगवी जो अल कायदा और इस्लामिक स्टेट का संगठित समूह है इसलिए यह कानूनी तौर पर पाकिस्तान में प्रतिबंधित है। इनपर आरोप है कि इस संगठन ने हजारों शियाओं की हत्या की जिम्मेदार है।
चुनावी स्थिति- उम्मीदवार राह-ए-हक और निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं।
कुल उम्मीदवार-150
मुत्ताहिदा मजलिस-ए-अमल
नेता- मौलाना फजल-उर-रहमान, सिराजुल हक और अल्लामा साजिद नक्वी
कानूनी स्थिति- लंबे समय से यह चुनाव आयोग में पंजीकृत है।
चुनावी स्थिति- यह एक धार्मिक संगठन की पार्टी है। इसके अतंगर्त दो पार्टी के बैनर तले अधिकतर उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं। साथ ही छोटे-छोटे समूह बी एमएमए गठबंधन के अतंगर्त लड़ रहे हैं।
उम्मीदवार -595
नेशनल एसेंबली-191
प्रांतीय चुनाव-404
पिछले पाकिस्तान आम चुनाव में भी कुछ धार्मिक पार्टियों ने राष्ट्रीय एवं प्रांतीय विधानसभाओं में कुछ सौ उम्मीदवार उतारे थे। वहीं इस चुनाव में उनकी संख्या बढ़कर 1,500 से अधिक हो चुकी है। हालांकि असली समस्या वे नई इस्लामी पार्टियां हैं, जिन पर आतंकियों से संबंध होने के आरोप लगते रहे हैं।
तहरीक-ए-लब्बैक नाम की नई पार्टी का नारा ही ‘ईशनिंदा के आरोपियों को मौत मिले’ है। पंजीकृत होने के बावजूद इस पार्टी को उम्मीदवार खड़े करने पर पाबंदी है। फिर भी 566 उम्मीदवार उतारने वाली यह पार्टी पीएमएल-एन को ईशनिंदा का आरोपी बताती है।
वहीं पीटीआई नेता इमरान खान कहते हैं कि ‘आप मुस्लिम नहीं हो सकते हैं अगर आप यह नहीं मानते कि पैगंबर, हमारे पैगंबर, आखिरी पैगंबर थे। इसलिए इसका समर्थन करना अपने धर्म का समर्थन करना है।’