भारतीय एजेंसियों और विदेश मंत्रालय की पाकिस्तान के दिनों दिन तनावपूर्ण हो रहे अंदरुनी राजनीतिक हालात पर पैनी नजर है। पाक सेना प्रमुख जनरल राहिल शरीफ और प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के बीच विचारों का जबरदस्त टकराव है।
6 अक्टूबर को डॉन अखबार में नवाज के लश्कर और जैश आतंकियों पर शिकंजा कसने संबंधी छपी खबर के सरकारी खंडन के पीछे का कारण सेना का दबाव बताया जा रहा है। खुफिया एजेंसियों की तरफ से आ रही जानकारी के मुताबिक रावलपिंडी और इस्लामाबाद की बढ़ती दूरी नवाज के लिए 1999 के तख्तापलट की पुनरावृति का संकेत दे रहा है।
16 साल पहले पूर्व पाक जनरल परवेज मुशर्रफ ने नवाज शरीफ की चुनी हुई सरकार पर बिना किसी खून खराबे के कब्जा कर लिया था। वह तख्तापलट करगिल युद्ध के बाद अंजाम दिया गया था। उच्चपदस्थ सरकारी सूत्रों ने अमर उजाला को बताया कि नवाज शरीफ पर पाक सिविल सोसायटी और विपक्षी दलों का आतंकियों पर शिकंजा कसने का जबरदस्त दबाव है।