पाकिस्तान में चीन चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) का निर्माण कर रहा है। अब इन दोनों देशों की साझेदारी में सऊदी अरब का नाम भी जुड़ गया है। माना जा रहा है कि मल्टी बिलियन डॉलर वाली इस योजना के तहत यह कदम इमरान खान के नेतृत्व वाली तहरीक-ए-इंसाफ सरकार को खतरनाक आर्थिक स्थिति से उबारने के लिए उठाया गया है।
पाकिस्तान के सूचना मंत्री फवाद चौधरी ने कहा, सीपीईसी परियोजना में
सऊदी अरब को रणनीतिक साझेदार बनाने के लिए चीन को विश्वास में लिया गया है। उन्होंने यह जवाब पूर्व मंत्री अहसान इकबाल के पूछे एक सवाल के जवाब में दिया। जिसमें इकबाल ने पूछा था कि क्या सऊदी को साझेदार बनाने से पहले क्या चीन को आधिकारिक तौर पर आमंत्रित किया गया था।
दरअसल इकबाल ने ट्वीट किया था, 'सीपीईसी दो देशों की परियोजना है तो क्या इसके लिए चीन को विश्वास में लिया गया है?' इसके जवाब में चौधरी ने ट्वीट करते हुए बताया, 'सीपीईसी का विस्तार चीन और पाकिस्तान दोनों के हित में है और इसके लिए चीन की सहमति ली गई है।'
हाल ही में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री
इमरान खान अपनी पहली विदेश यात्रा पर सऊदी अरब गए थे और माना जा रहा था कि वह देश के लिए कोई खास सौगात लेकर लौटेंगे। चौधरी ने सऊदी के परियोजना में शामिल होने की घोषणा करते हुए बताया कि सऊदी अरब ने पाकिस्तान के विकास के लिए जुड़ने की इच्छा जताई है। उन्होंने कहा, 'अक्टूबर के पहले सप्ताह में सऊदी के वित्त और ऊर्जा मंत्री के साथ एक खास दल परियोजना के सिलसिले में पाकिस्तान आएगा। जो इस ग्रांड आर्थिक साझेदारी के विवरण पर काम करेगा।'
चौधरी जोकि खान के साथ यात्रा पर गए थे उन्होंने गुरुवार को बताया था, 'एक उच्च स्तरीय समन्वय समिति का गठन किया गया है और इसे सऊदी के राजा सलमान बिन अब्दुल अजीज अल-सौद के साथ ही राजकुमार मोहम्मद बिन सलमान और पीएम इमरान खान का पूर्ण समर्थन है।' माना जा रहा है कि सऊदी अरब पाकिस्तान में निवेश करेगा।