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अब पाकिस्तान ने भी माना भारत के बिना संभव नही सार्क सम्मेलन

Thu, 29 Sep 2016 05:35 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली/ काठमांडू
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- फोटो : amarujala
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उड़ी आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान को अलग-थलग करने की भारत की कूटनीतिक मुहिम को बुधवार को एक बड़ी कामयाबी मिल गई। इस्लामाबाद में इसी साल नवंबर में होने वाला सार्क देशों का 19वां सम्मेलन स्थगित कर दिया गया है। सार्क अध्यक्ष देश नेपाल के अखबार ‘काठमांडू पोस्ट’ के हवाले से यह खबर प्रकाशित की गई है।
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हालांकि नेपाली विदेश मंत्रालय ने अभी तक इसकी पुष्टि नहीं की है लेकिन नेपाली विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने इसके स्थगन का संकेत दिया है। वैसे भी एक भी सदस्य राष्ट्र के हिस्सा नहीं लेने पर नियमों के मुताबिक सार्क बैठक अपने-आप स्थगित हो जाती है।

मंगलवार को इस सम्मेलन से भारत की दूरी बनाने की घोषणा के बाद बांग्लादेश, भूटान और अफगानिस्तान ने भी शिरकत न करने की घोषणा कर दी थी। इसके बाद बुधवार को एक अन्य सदस्य देश श्रीलंका ने भारत के सम्मेलन में शामिल न होने पर इसकी प्रासंगिकता पर सवाल खड़े कर दिए थे।
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हालांकि आठ सदस्यीय सार्क के मौजूदा अध्यक्ष नेपाल ने इस्लामाबाद के बदले किसी अन्य जगह पर सम्मेलन बुलाने के विकल्प पर विचार किया था। सार्क के अन्य सदस्य देशों की ओर से अपना रुख स्पष्ट करने के बाद ही नेपाल इस संबंध में टिप्पणी करेगा। फिलहाल नेपाल के विदेश मंत्री प्रकाश शरण महत, विदेश सचिव शंकर दास बैरागी और सॉर्क के महासचिव अर्जुन बहादुर थापा न्यूयॉर्क दौरे पर हैं।  
उधर, पाकिस्तान को भी आखिरकार मानना पड़ा है कि भारत समेत चार देशों के इनकार के बाद इस्लामाबाद में सार्क सम्मेलन होना मुश्किल है। विदेश मामलों पर प्रधानमंत्री के सलाहकार सरताज अजीज ने कहा, ‘यदि कोई एक देश इसमें हिस्सा लेने से मना कर देता है तो सम्मेलन नहीं हो सकता।’

अफगानिस्तान, बांग्लादेश और भूटान भी नहीं जाएंगे पाक

सार्क सम्मेलन - फोटो : ANI
उनका यह बयान इस बात का संकेत है कि चार देशों के बहिष्कार के बाद वहां सम्मेलन होना संभव नहीं है। अजीज ने कहा कि यह पहला मौका नहीं है जब भारत ने क्षेत्रीय सहयोग की बैठक में हिस्सा लेने से मना किया है।

भारत की वजह से अतीत में चार बार यह सम्मेलन टाला जा चुका है। इससे पहले पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नफीस जकारिया ने रेडियो पाकिस्तान के हवाले से कहा था कि पाकिस्तान 9 और 10 नवंबर में 19वां सार्क सम्मेलन बुलाएगा।

हालांकि सार्क सम्मेलन का स्थगित होना उसी समय तय हो गया था जब भारत ने इसमें शिरकत करने से इनकार कर दिया था। कूटनीतिक दृष्टि से सम्मेलन रद्द होने का महत्व यह है कि इस मामले में भारत को चार अन्य देशों का साथ मिला है। इनमें से तीन देशों बांग्लादेश, भूटान और अफगानिस्तान ने भारत की तरह ही आतंकवाद को मुद्दा बना कर सम्मेलन में शिरकत न करने की घोषणा की थी।

काठमांडू में नेपाली विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि फिलहाल सार्क सम्मेलन स्थगित ही समझा जाए। नेपाल इस बात को लेकर भी सतर्क है कि पाकिस्तान अपने यहां सार्क सम्मेलन आयोजित करने की जिद कर सकता है। 

क्या है सार्क

saarc
सार्क का गठन 1985 में हुआ था। इस गुट में भारत सबसे बड़ा सदस्य है। 1985 के बाद यह पहला मौका है, जब भारत ने सार्क सम्मेलन का बायकॉट करने का फैसला लिया है। इस सम्मेलन में भारत के नहीं जाने से आयोजन की सारी तैयारियां धरी की धरी रह गई हैं। 

जीडीपी के हिसाब से सार्क की इकॉनमी दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। सार्क के सदस्य देश दुनिया के तीन फीसदी दायरे में फैले हुए हैं और दुनिया की पूरी आबादी का करीब 21 फीसदी हिस्सा इन देशों में रहता है।

इन आठ देशों में भारत का क्षेत्रफल और आबादी 70 फीसदी से भी ज्यादा है। सार्क में भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश, अफगानिस्तान, मालदीव, भूटान और नेपाल शामिल हैं। 
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कांग्रेस-भाजपा में तू-तू मैं-मैं

मनीष तिवारी - फोटो : ANI
सार्क सम्मेलन के बहिष्कार के सवाल पर भाजपा और कांग्रेस ने एक-दूसरे पर सियासी निशाना साधा। कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने सरकार पर आतंकवाद के मोर्चे पर पाकिस्तान को घेरने में नाकाम रहने का आरोप लगाया। पार्टी ने सार्क सम्मेलन का बहिष्कार न करने की नसीहत भी दी।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को अलग-थलग तो किया जाना चाहिए, मगर सार्क सम्मेलन को स्थगित नहीं किया जाना चाहिए। जवाब में भाजपा ने कांग्रेस पर दिग्भ्रमित होने का आरोप लगाया। पार्टी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि कांग्रेस इस मामले में अपना रुख स्पष्ट नहीं कर पा रही। सम्मेलन में हिस्सा लेने पर यही कांग्रेस पूछती कि वहां क्यों गए? न जाने पर पूछ रही है कि बहिष्कार क्यों कर रहे हैं?
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