एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान कठिन समय के लिए तैयार है और ट्रंप प्रशासन की नई अफगानिस्तान रणनीति के चलते पाकिस्तान किसी भी नतीजे की भरपाई के लिए चीन और रूस के साथ गहरे रिश्ते भी तलाश सकता है। अमेरिकी रक्षामंत्री ने एक दिन पहले ही कहा कि नई नीति एक पूर्व दक्षिण एशिया रणनीति है। अमेरिकी राष्ट्रपति अफगानिस्तान पर अपनी नीति की समीक्षा के दौरान भारत की भूमिका पर भी विचार कर रहे हैं।
पाक अखबार ‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ ने इस योजना से संबंधित कम से कम दो अधिकारियों के हवाले से कहा कि - ‘पाकिस्तान नई अफगान रणनीति के किसी भी नतीजे को संतुलित करने के लिए विकल्पों पर विचार कर रहा है।’ रिपोर्ट के मुताबिक पाक अधिकारियों ने माना है कि वाशिंगटन से मिले संकेतों को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि आगामी महीनों में इस्लामाबाद के धैर्य की परीक्षा होगी।
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एक अधिकारी ने बताया कि ‘यदि अमेरिका पाक के खिलाफ कठोर कदम उठाता है तो उसके पास चीन और रूस के पास जाकर सहयोग बढ़ाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।’
इस मीडिया रिपोर्ट मे दावा किया गया है कि रूस के साथ पाकिस्तान के रिश्ते भी अब शीतयुद्ध के शत्रुता भरे संबंधों से आगे बढ़ चुके हैं।
पाक की पहली योजना के बारे में एक अधिकारी ने कहा कि - आकस्मिक हालात में यदि अमेरिका पाक चिंताओं पर गौर किए बिना भारत की ही लाइन पर आगे बढ़ता है तो हम निश्चित रूप से चीन और रूस के करीब चले जाएंगे। चीन के साथ पहले ही पाक के संबंध हैं। जबकि हिजबुल मुजाहिदीन को आतंकी संगठन बताने के अमेरिकी फैसले से पहली ही पाक नीति निर्धारक खफा हैं।
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