कराची में बिल्डरों द्वारा मंदिर को गिराए जाने के मामले ने एक बार फिर दिखा दिया है कि पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यक हिंदू कितने असुरक्षित हो गए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बिल्डर मंदिर तोड़ने के लिए शनिवार सुबह पहुंचे जब उच्च अदालतें बंद थीं और किसी तरह का न्यायिक हस्तक्षेप नहीं हो सकता था।
हिंदू समुदाय अब अपनी धार्मिक वस्तुओं, तस्वीरों और मूर्तियों को गिराए गए मंदिर के मलबे के बीच लेकर बैठा है। लेकिन क्या हिंदू समुदाय एक बड़े बिल्डर को इस स्थान से दूर रख पाएगा जहां समाज छोटे से हिंदू समुदाय के लिए संवेदनाशून्य है।
कुछ लोगों के अनुसार 80 साल पुराना राम पीर मंदिर उन मंदिरों में शामिल है जिनकी जमीन को लेकर विवाद है और बिल्डर उस विवाद का हिस्सा है। जहां ये मंदिर स्थित था उस ज़मीन पर सेना का मालिकाना हक था। 2008 में सेना इस्टेट ऑफिसर ने मंदिर और इसके आस-पास रहने वाले दर्जन भर हिंदू परिवारों को इसे खाली करने के आदेश दिए ताकि इस ज़मीन को कराची के एक बिल्डर को बेचा जा सके।
इस जमीन पर रहने वाले हिंदू परिवारों की अपील को कोर्ट ने नवंबर में खारिज कर दिया जिसके बाद इस ज़मीन को ताकत का इस्तेमाल कर खाली करवाने का रास्ता साफ़ हो गया। स्थानीय हिंदू समुदाय ने रविवार को इसके खिलाफ एक बड़ा प्रदर्शन किया और कहा कि तोड़-फोड़ दस्ते ने धार्मिक मूर्तियों को नुकसान पहुंचाया और कई गरीब हिंदू परिवारों के सिर से छत छीन ली।
हिंदू-मुसलमान के बीच वैरभाव 1947 से चला आ रहा जब मुस्लिम बहुल पाकिस्तान को धार्मिक आधार पर एक अलग राष्ट्र बनाया गया था। अधिकतर ऊंची जाति के हिंदू पाकिस्तान छोड़कर भारत चले गए जबकि दलित जाति के हिंदू पाकिस्तान में ही रह गए जो मुख्य रूप से गरीब और अनपढ़ हैं। 1980 में जब इस्लामी चरमपंथ का दौर आया तो असुरक्षित हिंदू समुदाय और ज्यादा असुरक्षित हो गया।
धर्म परिवर्तन को मजबूर
पिछले कुछ वर्षों में हिंदुओं को सिलसिलेवार ढंग से महिलाओं के अपहरण और जबरन धर्मांतरण का सामना करना पड़ा है। इस तरह के कदमों को अकसर निगरानी गुटों का संरक्षण मिला होता है। इन गुटों का काम होता है, अल्पसंख्यक हिंदुओं पर दबाव बनाना। इस बात के सबूत मिले थे कि फरवरी 2012 में जब 17 वर्षीय हिंदू लड़की रिंकल कुमारी मीरपुर माथेलो से गायब हो गई थी।
सिंध प्रांत में गायब हुई रिंकल कुमारी बाद में एक स्थानीय दरगाह में मिली थी जिसकी देख-रेख एक प्रभावशाली मुस्लिम परिवार कर रहा था। जब लड़की का धर्म परिवर्तन हुआ और उसकी एक स्थानीय मुसलमान युवक से शादी हुई तो उसकी खुशी मनाने के लिए दरगाह के हथियारबंद ज़ायरीनों ने हवा में गोलियां चलाई।
हालांकि रिंकल ने अदालत में बयान दिया कि उसने अपनी मर्जी के इस्लाम को अपनाया है जबकि उसके परिवार वालों का दावा था कि उसे धमकाया गया था और असल में चार लोगों ने उसका अपहरण किया था।
मानवाधिकार संगठन कहते हैं कि इस तरह के दर्जनों मामले हैं जहां हिंदू लड़कियों का अपहरण किया गया और उनका धर्म परिवर्तन किया गया। ये सब मामले अधिकतर सिंध प्रात के हैं जहां सबसे ज्यादा हिंदू रहते हैं।
इनमें से जो अमीर हैं और व्यापारी वर्ग के हैं वो अपहरण और आपराधिक गुटों का आसान शिकार होते हैं, जिन्हें अकसर फिरौती के लिए अगवा कर लिया जाता है।
बाबरी का असर
हिंदुओं के धार्मिक स्थलों का भी इसी तरह से अपमान होता है। जब हिंदू कट्टरपंथियों ने 1992 में उत्तर भारत के अयोध्या में बाबरी मस्जिद को ढहाया तब पाकिस्तान में मुस्लिम उपद्रवियों ने जवाब में पाकिस्तान भर में दर्जनों मंदिरों और हिंदू स्थलों को बर्बाद कर दिया। और तब से ही हिंदू मंदिरों पर छुटपुट हमले होते रहे हैं।
मई 2012 में कुछ अज्ञात लोगों ने पेशावर में पुरातात्विक परिसर के बीच स्थित 19वीं सदी के एक मंदिर को क्षतिग्रस्त कर दिया था। इन अज्ञात हमलावरों ने धर्म ग्रंथ, तस्वीरों में आग लगा दी गई और मूर्तियों को तोड़ दिया था।
पाकिस्तान के कानून में अब भी औपनिवेशिक समय के कानून हैं जिनमें धार्मिक स्थानों और वस्तुओं का अपमान करने के लिए सज़ा निर्धारित है। लेकिन ये समाज पर निर्भर करता है कि समाज उन्हें लागू करने के लिए कितना प्रतिबद्ध है।
कराची के ढोली खाटा क्षेत्र में सामाजिक रुप से कमज़ोर हिंदओं का प्रभावशाली बिल्डरों, सेना के ताकतवर अधिकारियों और जनता की सोच से मुकाबला है जो कि मौटे तौर पर हिंदुओं के खिलाफ इस्लामिक संगठनों के प्रभावित है।