पाकिस्तानी मॉडल क़ंदील बलोच की मां का कहना है कि कंदील को पता था कि उसका भाई उसकी जान लेने वाला है। कंदील के भाई वसीम ने पिछले हफ़्ते उनकी हत्या कर दी थी। कंदील को पाकिस्तान की किम कारडाशियां कहा जाता था और सोशल मीडिया में वो काफ़ी लोकप्रिय थीं, हालांकि चाहने वालों की तरह उनसे नफ़रत करने वालों की भी कमी नहीं थी। उनकी मौत पर उनके माता-पिता के आंसू रुक नहीं रहे। बेटे शादी कर अलग घर बसा चुके थे, उनके जीने का वही अकेला सहारा थी। बीबीसी उर्दू संवाददाता शबा एतजाज़ ने उनकी मां अनवर अज़ीम और उनके पिता मोहम्मद अज़ीम से बात की।
अनवर अज़ीम से बातचीत के अंशः
उसने भाई के साथ शाम का खाना खाया। वसीम ने हमें महसूस ही होने नहीं दिया कि वो कंदील का बुरा चाह रहा है। भाई-बहन जैसे प्यार करते हैं दोनों वैसे ही थे। मेरे दिल में कोई शक़ नहीं पड़ा कि मेरा बेटा, मेरी बेटी के साथ ऐसा करेगा। मैं और मेरे पति सो गए। वसीम ने हमें नशे की गोली मिलाकर दूध दिया था जिसे हमने सोने से पहले पिया था। जब सुबह उठकर कंदील को आवाज़ दी कि बेटा नाश्ता कर लो, लेकिन कोई जवाब नहीं आया। पहले वक़्त पर उठ जाती थी, पर वो नहीं उठी। मैंने जाकर देखा तो वो सफ़ेद चादर ओढ़कर पड़ी हुई थी। मैंने उसके चेहरे से चादर हटाई। सारे चेहरे पर निशान थे, ज़ुबान काली, होंट काले। मैं वहीं ख़त्म हो गई। मुझे पूरा यक़ीन था कि ये काम वसीम ने किया है, क्योंकि वो हमारे साथ ठहरा हुआ था। जैसे आजकल हालात चल रहे थे, ऐसे समय वसीम आया। उसकी किसी दोस्त या भाई से बात हुई थी।
किसी ने बताया कि वसीम, कंदील को मारने वाला है। जब कंदील को पता लगा तो उसने कहा बड़ा आया मुझे मारने वाला। मैंने और कंदील के पिता ने वसीम को डांटा कि इसलिए बड़े हुए हो कि बहन की जान ले लो। मां-बेटियां दुख-सुख बांटती हैं, दिल के राज़ बताती हैं। वो मुझे बताती थी कि तेरी बेटी ने बहुत मेहनत की है और वो बहुत ऊपर चली गई है। और मैं कहती थी अच्छा कंदील अल्लाह तुमको कामयाब करे। इस दफ़ा आई तो कह रही थी तेरी बेटी के दुख ख़त्म हो गए हैं। जो मेरी बुराई करते हैं उनको बाद में पता चलेगा कि कंदील कैसी थी। वो कह रही थी कि मेरी तरक्की का समय आ गया है। लेकिन उनके दिल में शुरू से ही नफ़रत थी।पहले ज्यादा परवाह नहीं करते थे पर जब हालात ख़राब हुए, दुनिया ने उनको भड़काया और उनके ज़हन ख़राब कर दिए। वो कहते थे कि कंदील अब ये काम ना करे। उसको इस काम से रोक दो। हम बलोच खानदान से हैं। लोग हमें बुरा-भला कह रहे हैं।
हम बहुत गरीब हैं, हमें बेटी सहारा देती थी। बेटे शादीशुदा हैं, बीवी-बच्चों के साथ खुश हैं वो हमारा ख्याल नहीं रखते थे। वो हमें प्यार करती थी, गांव से ये कहकर यहां लेकर आई थी कि आपका खर्चा उठा सकती हूं। पहले तो सकून था। लेकिन ये जो रमज़ान का महीना है इसमें शोर-शराबा मचा। गलत तस्वीरें, गलत बातें फैलीं। इसी वजह से हुआ। भाई पागल हो गया, उसके दोस्त ताने देते थे कि ये तेरी बहन है। हम तो मां-बाप होकर खुश थे। बाकी जो जल रहे थे उन्होंने अपना काम कर दिखाया। मेहनत करके आगे बढ़ी। बेटे को सज़ा मिलनी चाहिए उसने ग़लती की है, उसने नाजायज़ क़त्ल किया, ऐसा क्यों किया उसने ? मैं नहीं माफ़ करूंगी बेटे को। मेरी लायक बच्ची, मर्दों की तरह बहादुर लड़की थी। क्या कसूर किया था उसने ?
कंदील के पिता: बेटा फौज में है। कहता था शादी कर लो वरना मेरी बहन नहीं हो। बेटी भी थी, जिगरी दोस्त भी थी। बेटा भी। एक अच्छे से अच्छे बेटे से अच्छी बेटी। जबसे अब्दुल कवि वाली बात हुई है तब से लोगों ने शिकायतें करनी शुरू कर दीं। लोगों ने बेटे को भड़का दिया होगा। जब कंदील यहां आई वो भी यहां आया। हमें कोई इल्म नहीं था कि वो इस इरादे से आ रहा है।
मुफ़्ति अब्दुल कवि के नाम पर पाकिस्तान में झगड़ा उठा। वो बहुत डरी हुई थी। कई बार कहती थी कि अगर कोई घर के बाहर मेरे बारे में पूछता है तो पूछो वो कौन है। वसीम को सज़ा होनी चाहिए। मैं तो कहता हूं कि जहां वो नज़र आए उसे गोली मार दो। मेरी बच्ची को मार दिया। अब्बा-अम्मा ऊपर बेहोश थे। उसने शोर भी मचाया होगा, अम्मा को बुलाती होगी, अब्बा को बुलाया होगा। लेकिन हम सुन नहीं पाए। हमें दर्द नहीं, बहुत तक़लीफ़ है।