पाकिस्तान में भ्रष्टाचार विरोधी प्रदर्शनों का नेतृत्व कर रहे ताहिरुल कादरी ने अपनी मांगों को मनवाने के लिए सरकार को बुधवार रात तक की मोहलत दी है।
इससे पहले उन्होंने अपने समर्थकों के सामने अपने उस भाषण को पूरा किया, जो उन्होंने मंगलवार को प्रधानमंत्री राजा परवेज़ अशरफ़ की गिरफ़्तारी के अदालती आदेश के बाद अधूरा छोड़ दिया था।
ताहिरुल कादरी ने कहा, "हमारी मांगें वहीं हैं, जो 23 दिसंबर को थीं।" उन्होंने एक बार फिर सरकार की आलोचना की और कहा कि इस सरकार के जाने में अब सिर्फ़ कुछ ही दिन बचे हैं।
उन्होंने अपनी मांगों को मनवाने के लिए एक बार फिर समयसीमा बढ़ाते हुए सरकार को बुधवार रात तक की मोहलत दी। वो सरकार से अपने सात सूत्री मांगों को लागू करने के लिए दबाव डाल रहे हैं।
इनमें ये मांग भी शामिल है कि पाकिस्तान की सभी असेंबलियों को भंग किया जाए और चुनाव आयोग का भी नए सिरे से गठन हो।
इस बीच प्रदर्शनों के कारण इस्लामाबाद में आम जनजीवन पर व्यापक असर हुआ है। खाने और ईंधन की आपूर्ति में बाधाओं को देखते हुए व्यापारिक प्रतिष्ठान और स्कूल बंद कर दिए गए हैं।
नवाज सक्रिय
लाहौर में पाकिस्तान मुस्लिम लीग (एन) के प्रमुख नवाज़ शरीफ़ ने विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के नेताओं को मौजूदा स्थिति पर सलाह-मशविरा करने के लिए आमंत्रित किया है।
इनमें जमाते इस्लामी के सैयद मुनव्वर हसन और पख़्तून ख़्वाह मिल्ली आवामी पार्टी के महमूद ख़ान अचकज़ई भी शामिल हैं।
इससे पहले बुधवार की सुबह आवामी नेशनल पार्टी के एक शिष्टमंडल ने ग़ुलाम अहमद बिल्लौर और आज़म ख़ान होती के नेतृत्व में नवाज़ शरीफ़ से लाहौर में मुलाक़ात की।
मंगलवार को ताहिरुल कादरी ने इस्लामाबाद में हज़ारों लोगों के सामने भाषण में कहा था कि इनके सात सूत्री एजेंडे की आख़िरी मांग असेंबलियों को भंग करना है और वो अपना हक़ लिए बिना वापस नहीं जाएँगे।
उन्होंने आगे कहा कि ये एक क़ानूनी मार्च है, जिसका मक़सद देश को तबाही से बचाना है और वे वास्तविक लोकतंत्र चाहते हैं, जबकि पाकिस्तान में सिर्फ़ दो संस्थाएँ काम कर रही हैं। एक है सेना और दूसरा न्यायपालिका।
दूसरी ओर प्रधानमंत्री राजा परवेज अशरफ ने मंगलवार को कहा था कि किसी असंवैधानिक क़दम या लोकतांत्रिक प्रक्रिया को पटरी से उतारने की किसी भी कोशिश से सख़्ती से निपटा जाएगा।