फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नवाज के भाई क्यों नहीं बनेंगे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री?

Wed, 09 Aug 2017 10:22 AM IST
बीबीसी, हिन्दी
विज्ञापन
नवाज शरीफ
विज्ञापन
नवाज शरीफ ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री पद से हाथ धोते ही अपने भाई शाहबाज शरीफ के नया प्रधानमंत्री बनने की बात रखी थी। लेकिन अब नवाज शरीफ ने इससे पीछे हटने का फैसला किया है।
विज्ञापन

शाहबाज शरीफ फिलहाल पंजाब सूबे के मुख्यमंत्री हैं और, पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट ने पनामा पेपर्स में नाम आने के बाद नवाज शरीफ को प्रधानमंत्री पद के लिए अयोग्य करार दिया है। इसके बाद से उनके भाई शाहबाज को प्रधानमंत्री बनाए जाने की अटकलें तेज हो गई थीं।

शरीफ की पार्टी पीएमएल-एन की संसदीय दल की बैठक में प्रधानमंत्री के पद के लिए शाहबाज के नाम को मंजूरी मिल गई थी। लेकिन शाहबाज नेशनल असेंबली के सदस्य नहीं हैं और उनके नेशनल असेंबली में शामिल होने तक ये जिम्मेदारी शाहिद खकान अब्बासी को सौंपी गई थी। लेकिन नवाज शरीफ ने बीते सोमवार को पत्रकारों से बात करते हुए साफ कर दिया है कि शाहबाज फिलहाल पंजाब में ही रहेंगे और नवाज शरीफ की सीट एनए 120 पर होने वाले उपचुनाव में हिस्सा नहीं लेंगे।
विज्ञापन


ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर वह कौन से कारण थे जिनकी वजह से पाकिस्तान की सत्ताधारी पार्टी के फैसले में इतना बड़ा परिवर्तन आया।

पंजाब का विकास है बड़ा मुद्दा

शाहबाज शरीफ को शाहबाज स्पीड के नाम से भी जाना जाता है। और, पंजाब के सीएम को ये नाम एक चीनी नागरिक ने दिया है जो पंजाब में चल रही विकास परियोजनाओं में काम की गति से प्रभावित था। पंजाब के मुख्यमंत्री शाहबाज को अपना ये निकनेम भी खूब पसंद है।

बीते कुछ दिनों में, पार्टी नेतृत्व में ये राय बनती नजर आ रही है कि अगर शाहबाज को पंजाब से दूर करते हैं तो विकास परियोजनाएं प्रभावित होंगी। और, ये परियोजनाएं अगले चुनावों से पहले पूरी नहीं हो पाएंगी जिससे पार्टी को नुकसान उठाना पड़ सकता है।

पाकिस्तान के सबसे बड़े सूबे पंजाब की सत्ता शरीफ परिवार के हाथ में रही है। सत्ता अगर, शरीफ परिवार के सदस्य के हाथ में नहीं तो उनके किसी उम्मीदवार के हाथों में रही है।
विज्ञापन

पंजाब में चुनाव जीतने वाली पार्टी के हाथ ही पाकिस्तान की सत्ता लगती है।

शाहबाज शरीफ
लीग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, ऐसा कम ही देखा गया है कि नवाज और शाहबाज अहम राजनीतिक मुद्दों पर अलग-अलग दिखाई दिए हों। लेकिन, पंजाब के मुख्यमंत्री उम्मीदवार के चयन के मामले में ऐसा कई बार देखा गया। कहा जाता है, नवाज शरीफ की बेटी अपने किसी खास को मुख्यमंत्री बनाना चाहती थीं। वहीं, शाहबाज के बेटे हमजा की पसंद कोई और था। और, शरीफ परिवार के ये दोनों कैंप अपने-अपने उम्मीदवार के लिए कोशिशें शुरू कर चुके थे।

पंजाब में चुनाव जीतने वाली पार्टी के हाथ ही पाकिस्तान की सत्ता लगती है। ऐसे में पंजाब का चुनाव ही शाहबाज और प्रधानमंत्री पद के बीच दीवार बनकर खड़ा हो गया।

नवाज शरीफ ने सत्ता हाथ से जाते ही शाहबाज शरीफ का नाम उत्तराधिकारी के रूप में घोषित कर दिया। और, ये प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हुआ। लेकिन जब प्रस्ताव के समर्थन करने वालों का शोर खत्म हुआ तो पार्टी के नेताओं ने नवाज शरीफ को इस राजनीतिक समीकरण के दूसरे पहलू से भी अवगत कराया। और, ये पहलू था चुनाव से पहले पीएमएल - एन को तोड़ने की आशंकाएं। पार्टी नेताओं का कहना था कि मजबूत नेताओं को दूसरे दलों में शामिल होने का प्रलोभन दिया जाएगा और पार्टी को संगठन के नजरिये से भी कमजोर करने की कोशिशें होने की आशंका जताई गई।

पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के मुताबिक, ऐसी स्थिति से जूझने के लिए शाहबाज से बेहतर कोई और नहीं हो सकता। आखिर, दस महीने का प्रधानमंत्री पद के लिए पंजाब को गंवाना कैसी राजनीतिक समझदारी है?
हालिया घटनाओं को देखा जाए तो नवाज शरीफ पाक गृहमंत्री चौधरी निसार अली खान के लाख समझाने के बावजूद टकराव की राजनीति करने की मंशा रखते दिखाई पड़ रहे हैं।

एक तरफ वो कई राजों से पर्दा उठाने की बात कर रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट की आदेश के बावजूद जीटी रोड से जाने की जगह लाव-लश्कर के साथ लाहौर पहुंचते हैं। ये संकेत बताते हैं कि शरीफ चौधरी निसार के सुझावों को दरकिनार करते हुए शांति से बैठने वाले नहीं हैं।  ऐसे में जब वह सीधे-सीधे पंगा लेते दिख रहे हैं तो प्रधानमंत्री के रूप में उनके भाई शाहबाज ठीक व्यक्ति नहीं हैं। अब तक ये भी साफ हो गया है कि शाहबाज समझौतावादी राजनीति में विश्वास करते हैं और नवाज को भी समझाने की कोशिश कर रहे हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें