पाकिस्तान के चरमपंथी समूह लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफिज सईद ने हाल में हुए पेरिस हमले की निंदा की है और इसे पश्चिम में इस्लाम के 'जोरदार' उभार को रोकने की साजिश बताया है।
सईद पर भारत में 2008 के मुंबई हमले के मास्टरमाइंड होने का आरोप है, जिसे कई लोग पेरिस हमले की प्रेरणा मानते हैं। मुंबई हमले में 174 लोग मारे गए थे, जिसमें एक हमलावर बंदूकधारी भी शामिल था। पेरिस हमले में कम से कम 129 लोग मारे गए हैं।
पाकिस्तानी समाचार एजेंसी को एक साक्षात्कार में सईद ने कहा कि पश्चिमी दुनिया के मुसलमान खासकर फ्रांस के मुसलमानों को पेरिस हमले के लिए न दोष देना चाहिए और न निशाना बनाना चाहिए।
रिपोर्ट में सईद ने पूर्व ब्रितानी प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर के हवाले से कहा, "सच तो यह है कि कुछ दिन पहले पूर्व ब्रितानी प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने इस्लामिक स्टेट के उदय के लिए पश्चिमी ताकतों को जिम्मेवार ठहराया था और यह एक गलती थी।
इस्लामिक स्टेट इस्लाम को बदनाम कर रहा
"वे आगे कहते हैं, "इस्लामिक स्टेट मुसलमानों के खिलाफ पश्चिमी मुहिम की पैदाइश है और यह चरमपंथी संगठन पश्चिमी साम्राज्यवादी शक्तियों द्वारा स्थापित अंतरराष्ट्रीय संस्थानों की धुन पर नाचता है।"
पिछले महीने टोनी ब्लेयर ने कहा था कि 2003 में इराक पर हमले के कारण इस्लामिक स्टेट के उभार में मदद मिली है। यह पहली बार नहीं कि हाफिज सईद ने इस्लामिक स्टेट के खिलाफ बोला है। पिछले हफ्ते पाकिस्तानी शहर फैसलाबाद में उन्होंने कहा था कि फ्रांस जैसे हमलों से इस्लामिक स्टेट इस्लाम को बदनाम कर रहा है और दुश्मनों के हाथ मजबूत कर रहा है।
उन्होंने इस्लामिक स्टेट को मुसलमानों के लिए ज्यादा बड़ा खतरा बताया है। हाफिज सईद की ये टिप्पणियां इस संदर्भ में और भी दिलचस्प हैं कि सईद को संयुक्त राष्ट्र द्वारा अंतरराष्ट्रीय चरमपंथी के श्रेणी में रखा गया है।
हाफिज पर 66 करोड़ रुपए का इनाम
अमरीका ने उनकी गिरफ्तारी पर करीब 66 करोड़ रुपए का इनाम रखा है। मुंबई हमले के सिलसिले में पाकिस्तान ने कई संदिग्धों को गिरफ्तार किया था, जिनमें हाफिज सईद भी शामिल हैं। मगर कोर्ट ने उन्हें सुबूतों के अभाव में कुछ दिन बाद छोड़ दिया था।
उन्होंने हमेशा मुंबई हमले में अपनी भूमिका से इनकार किया है। अगस्त 2015 में भारत और पाकिस्तान के बीच सचिव स्तर की बातचीत तय तारीख से एक दिन पहले रद्द कर दी गई थी। क्योंकि भारत ने 'चरमपंथ से जुड़े मुद्दे' को छोड़कर किसी और मुद्दे पर बातचीत न करने पर जोर डाला था।
पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया रेगुलेटरी अथॉरिटी की ओर से जारी एक आदेश की वजह से हाफिज सईद दबाव में हैं। यह आदेश सभी प्रतिबंधित समूहों जिसमें लश्कर-ए-तैयबा भी शामिल है, के मीडिया कवरेज पर रोक लगाता है।
यह आदेश पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के अमरीकी दौरे के नतीजे के रूप में आया था। इस दौरे के दौरान उन्होंने लश्कर-ए-तैयबा पर कार्रवाई का भरोसा दिलाया था। हाफिज सईद ने लाहौर हाईकोर्ट में इस आदेश को चुनौती दे रखी है।