पाकिस्तान में अनिला अंसारी नामक एक सामान्य महिला ने रेडियो शो के जरिए औरतों को घूरने वालों के खिलाफ अभियान छेड़ दिया है। जिसे पुरुषों का समर्थन पूरी तरह से हासिल नहीं हो पा रहा है, लेकिन अनिला चाहती हैं कि पाकिस्तान में कम से कम औरतों को भारत जितनी आजादी तो मिल जाए। हाल ही में जियो टीवी ने भी इस महिला को कवर किया है।
रेडियो जॉकी अनिला अंसारी का यह अभियान बहुत तेजी से घर-घर की आवाज बन रहा है। अनिला को इस बात का मलाल है कि पाकिस्तान में औरतों का घर से निकलना न केवल बहुत मुश्किल बल्कि कई बार तो खतरनाक तक हो जाता है, क्योंकि मर्दों की निगाहें उन्हें लगातार घूरती रहती हैं। अनिला दो दशक तक ब्रिटेन में रहीं और इस साल की शुरूआत में ही पाकिस्तान लौटी हैं। यही कारण है कि उन्हें घूरने जैसी चीजों की आदत ही नहीं थी।
वह बताती हैं कि मैं किसी दफ्तर में जाऊं, रेस्तरां में जाऊं या कहीं और, पुरुषों की निगाहें हमेशा मेरा पीछा करती हैं। भारत में भी अपनी सहेलियों से बात करती हूं। वहां भी ऐसा है, लेकिन को-एड कॉलेज, दफ्तरों के माहौल में इतनी बदतर स्थिति वहां नहीं है। उन्होंने कहा कि दफ्तर में अपने सहयोगियों और सहेलियों से पूछा कि क्या ऐसा केवल मेरे साथ हो रहा है तो सबने एक ही बात कही कि इस बारे में तो बात बेकार है क्योंकि यह एक बीमारी है।
इस बारे में जब अनिला ने पुरुषों से पूछा तो पता चला कि उन्हें यह कोई समस्या ही नहीं लगती। वह कहती हैं कि या तो पाकिस्तानी पुरुष इस बात को हंसी में उड़ा देते हैं या फिर गु्स्सा हो जाते हैं। अनिला ने कहा कि वह लोगों को बताना चाहती हैं कि इस बात का असर महिलाओं की मानसिक सेहत पर पड़ता है और पढ़ाई, रोजगार व दूसरे मौके भी प्रभावित होते हैं।
करोड़ों पाकिस्तानी श्रोता हैं अनिला के प्रोग्राम के मुरीद
अनिला अंसारी रेडियो99 में काम करती हैं जिसका दावा है कि देशभर में उसके ढाई करोड़ सुनने वाले हैं। इस मुहिम के तहत अंसारी अपने शो में घूरने के मुद्दे पर बहस कराती रहती हैं और लोगों से भी कहती हैं कि वे फोन करके अपनी समस्याएं बताएं। रेडियो के निदेशक नजीब अहमद कहते हैं कि इस मुहिम को उनका चैनल पूरा समर्थन दे रहा है, और श्रोताओं में भी इस प्रोग्राम के प्रति काफी रुचि जागी है।
बहनों को ताले में बंद कर मर्द बाहर औरतों को क्यों घूरते हैं
महिलाओं और युवाओं को यह मुहिम काफी पसंद आ रही है। सना जाफरी कहती हैं कि इस मुहिम को उनका पूरा समर्थन है। उन्होंने कहा कि पाक के मर्द अपनी बहनों को तो तालों में बंद रखकर दूसरी औरतों को क्यों घूरते हैं। लेकिन लड़कों में इस अभियान को लेकर काफी नाराजगी है। लड़कों का कहना है कि लड़कियां अपने मां-बाप की इज्जत होती हैं। अगर वे बुरका नहीं पहनतीं तो वे घूरने की शिकायत भी नहीं कर सकतीं।