पाकिस्तान में एक सेवानृवित्त वकील ने देश की ख़ुफिया एजेंसियों पर आरोप लगाया है कि उनपर हमला करवाया गया ताकि वो सेना के खिलाफ जारी कानूनी लड़ाई बंद कर दें। कर्नल इनाम-उल-रहीम ने बीबीसी को बताया कि उनकी जान को खतरा है और शनिवार को हथियारबंद लोगों ने उनके 19 साल के बेटे को पीटा और उनकी कार को आग लगा दी। पिछले हफ़्ते उन्होंने सेना प्रमुख जनरल अशफ़ाक़ परवेज़ कयानी का कार्यकाल तीन साल बढ़ाने को कानूनी चुनौती दी थी।
इसी मामले पर अन्य याचिकाओं पर कुछ नहीं हुआ है। लेकिन इस बार इस्लामाबाद हाई कोर्ट ने याचिका स्वीकार कर ली है। मामले की सुनवाई 22 नवंबर को होनी है। बेटे के साथ कथित मारपीट की घटना के तीन दिन पहले कर्नल रहीम पर भी हमला हुआ था। इस कारण उनके चेहरे, सर और शरीर पर चोट आई है। कर्नल रहीम के साथ मारपीट की कथित घटना रावलपिंडी में सेना मुख्यालय के पास हुई। पाकिस्तानी सेना ने इन आरोपों को निराधार बताया है।
सेना के खिलाफ उठाई आवाज़
पिछले पाँच सालों में लोगों के लापता होने के मामलों में कर्नल रहीम ने सेना को कानूनी चुनौती दी हुई है। कर्नल इनाम-उल-रहीम उन लोगों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं जो वर्षों से गुमशुदा हैं और जिनके परिवारवाले कहते हैं कि उन्हें खुफिया एजेंसियों ने पकड़ा हुआ है।
कर्नल रहीम के मुताबिक जब वे पुलिस के पास गए तो पुलिस ने मामला दर्ज करने से मना कर दिया। बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा, “ये हमला मुझे बताने के लिए था कि मैं सैन्य नेतृत्व के ग़ैर क़ानूनी कदमों के खिलाफ़ कोर्ट केस न करूँ। मुझे लगता है कि ये हमले सेना प्रमुख के कहने पर खुफिया एजेंसी ने किए।”
पाकिस्तान में पूर्व सैन्यकर्मियों की सोसाइटी ने कर्नल रहीम पर हमले की निंदा की है। कर्नल तारिक़ कमाल ने कहा है, “ये हमारे लिए चिंता का विषय है। हम नहीं कह सकते कि हमले के पीछे कौन है। लेकिन जिसने भी ऐसा किया है उन्हें पकड़ना चाहिए।”
सेना और न्यायपालिका के बीच लड़ाई
57 साल के कर्नल रहीम ने सेना में 27 साल तक काम किया और हज़ारों सेना अधिकारियों को सैन्य कानून की तालीम दी। बाद में वे पाकिस्तानी सेना की का़नूनी ईकाई में जज भी थे। उनका कहना है, “मैने जल्दी रिटायरमेंट ले ली क्योंकि मेरे सामने आए मामलों को लेकर मुझपर ऊपर से दबाव रहता था और मैं ऐसा नहीं करना चाहता था।”
कुछ लोग कर्नल रहीम को धार्मिक विचारों वाले अच्छे वकील बताते हैं। कर्नल का कहना है कि वे संविधान के उल्लंघन पर सवाल उठा रहे हैं जो उनका हक़ है। कर्नल रहीम के मुताबिक उन्हें जान की धमकी दी जा चुकी है। वे बताते हैं, “पिछले हफ़्ते उन्होंने मुझे सेना के खुफिया विभाग में बुलाया था और मुझे कहा कि मैं गुमशुदा लोगों से जुड़े मामले छोड़ दूँ। वरना मुझे कुछ हो सकता है।”
जनरल कयानी के खिलाफ मामला ऐसे समय आया है जब न्यायपालिका मज़बूती से अपनी बात रखते हुए नज़र आ रही है और सेना नेतृत्व रक्षात्मक शैली अपनाए हुए है। पाकिस्तान में बहुत लोग मानते हैं कि इसी वजह से जनरल कयानी ने इस महीने कोर्ट को आगाह किया है कि ‘वे संस्थानों की अहमियत कम करना और देशहित के एकमात्र रक्षक बनना बंद करें,’