पाकिस्तान के इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में प्राइम-टाइम पर इन दिनों एक विज्ञापन में डॉक्टर ताहिरुल कादिरी को खूब दिखाया जा रहा है जो सोमवार को राजधानी इसलामाबाद से 'लांग-मार्च' निकाल रहे हैं।
कनाडा में रहने वाले पाकिस्तानी मूल के इस्लामी विद्वान डॉक्टर कादिरी इस मार्च की दो वजह बताते हैं। पहली, 'भ्रष्ट' सरकार से छुटकारा और दूसरी 'ईमानदार' लोगों की अंतरिम सरकार के तहत चुनाव सुधारों का मार्ग प्रशस्त करना।
लोगों से मार्च में शामिल होने का आह्वान करते हुए डॉक्टर कादिरी ने कहा है कि यदि आप बाहर नहीं निकले, यदि आपने मेरे हाथ मजबूत नहीं किए तो अगली पीढ़ी इस दिन पर अफसोस करेगी।
डॉक्टर कादिरी साल 2005 से कनाडा में रह रहे हैं और लगभग सात साल के बाद पाकिस्तान लौटे हैं। कनाडा में वह मिनहाजुल कुरान इंटरनेशनल के बैनर तले एक शैक्षणिक और जन-कल्याणकारी संस्था चलाते हैं जो उनके मुताबिक 80 से ज्यादा देशों में सक्रिय है।
'सरकार नहीं देश बचाओ'
डॉक्टर कादिरी के समर्थन में दिखाए जा रहे विज्ञापनों में नारा बुलंद किया जा रहा है- 'देश को बचाइए, राजनीति को नहीं।' कई लोगों के लिए इस संदेश का स्पष्ट मतलब यह है कि गंदगी साफ करने के नाम पर लोकतांत्रिक व्यवस्था को दरकिनार कर दिया जाए। पाकिस्तान के इतिहास में सैन्य शासक कई बार ऐसा कर चुके हैं।
पाकिस्तान में यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय हो रहा है जब देश में मई में चुनाव होने वाले हैं। देश के कई लोग डॉक्टर कादिर की इस तरह अचानक वापसी को पसंद कर रह हैं। लेकिन कई लोग उनके इरादों पर भी सवाल उठा रहे हैं क्योंकि देश में चार महीने बाद ही चुनाव होने हैं। लोग यह भी जानना चाह रहे हैं कि उनकी मुहिम को वित्तीय मदद आखिर कहां से मिल रही है।
'लोकतंत्र विरोधी ताकतों का एजेंट'
बीते साल 23 दिसंबर को उन्होंने लाहौर स्थित मीनार-ए-पाकिस्तान में लोगों को संबोधित किया था। पाकिस्तान की राजनीति को समझने वाले कई विश्लेषकों ने इसे एक विशाल सियासी रैली करार दिया। इस रैली से संकेत निकाला गया कि कादिरी आम लोगों के बूते पाकिस्तान की सत्ता को हिला सकते हैं।
कादिरी के सियासी मायने तब और बढ़ गए जब कराची की मुत्ताहिदा क़ौमी मूवमेंट पार्टी ने उन्हें अपना समर्थन दे दिया। पंजाब यूनिवर्सिटी से विधि-स्नातक कादिरी ने इस्लामी विद्वान और आम लोगों के लिए काम करने वाले नेता की छवि बनाई है।
वैसे पाकिस्तान के सभी राजनीतिक दल उन्हें 'पाकिस्तान विरोधी एजेंट' और 'लोकतंत्र विरोधी ताकतों का एजेंट' बताकर खारिज कर रहे हैं।
सवाल यह है कि डॉक्टर कादिरी जिस तरह से पाकिस्तान की राजनीति में प्रकट हुए हैं, क्या वह अपनी रफ्तार कायम रख पाएंगे।