उमर ने इंडोनेशिया में आईएमएफ के प्रबंध निदेशक (एमडी) क्रिस्टियन लागार्दे से मुलाकात कर पाकिस्तान के लिए बेलआउट पैकेज देने का आग्रह किया था। उमर ने कहा कि वैश्विक कर्जदाता संस्था से आग्रह करने का निर्णय मित्र देशों की सलाह के बाद लिया गया था। उन्होंने इन मित्र देशों का नाम नहीं बताया, लेकिन हालिया दिनों में पाकिस्तान ने लगातार चीन और सऊदी अरब से संपर्क किया है।
उमर ने बताया कि आईएमएफ की एक टीम का करीब तीन साल लंबे बेलआउट पैकेज के लिए 7 नवंबर को पाकिस्तान आना तय हुआ था। उन्होंने कहा, लागार्दे ने एक बात स्पष्ट की है कि आईएमएफ पाकिस्तान के पूरे कर्ज को लेकर पारदर्शी स्थिति चाहता है। इसमें चीन से सीपीईसी के तहत लिया गया गया करीब 50 अरब डॉलर का कर्ज भी शामिल है। इसी कारण उसने पूरे कर्ज का ब्योरा मांगा है।
पाक के वित्त मंत्री उमर ने कहा कि आईएमएफ की तरफ से लगाई जा रही शर्तों को मानकर कोई भी राजनीतिक बैकग्राउंड वाली सरकार पाकिस्तान में राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता नहीं कर सकती। उन्होंने आगे कहा, लेकिन अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं का पालन करने के लिए हमारी सरकार वर्तमान आर्थिक परेशानी से बाहर निकलने के लिए ये शर्तें मानने को तैयार है। हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि हम शायद आईएमएफ के बिना भी जिंदा रह सकते हैं, लेकिन ये बहुत दर्दनाक साबित होगा।
आईएमएफ नहीं माना तो जाएंगे दोस्तों के पास
उमर ने ये भी कहा कि सऊदी अरब, चीन और संयुक्त अरब अमीरात जैसे पाकिस्तान के मित्र देशों ने इन कठिन परिस्थितियों से बाहर निकलने के लिए ऐसी शर्त नहीं लगाई थी। लेकिन वित्त मंत्री ने ये नहीं बताया कि इन देशों ने पहले पाकिस्तान की कोई भी वित्तीय मदद क्यों नहीं की थी। उन्होंने कहा, यदि आईएमएफ की शर्तें मानने लायक नहीं हुई तो हम दोबारा मित्र देशों से ही गुहार लगाएंगे।
पाक के वित्त मंत्री ने अमेरिका के उस विचार को खारिज कर दिया, जिसमें नकदी की तंगी से जूझ रहे पाकिस्तान की वर्तमान वित्तीय बदहाली के लिए चीन के अनुदान से बन रही परियोजनाओं को जिम्मेदार ठहराया गया है। उमर ने कहा, चालू वित्त वर्ष में 9 अरब डॉलर की कर्ज अदायगी के बाद पाकिस्तान को अगले तीन साल तक महज 30 करोड़ डॉलर प्रति वर्ष की ही कर्ज अदायगी करनी है, जो बहुत मुश्किल आंकड़ा नहीं है।