पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट ने दोहरी नागरिकता रखकर संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन करने के मामले में बुधवार को गृह मंत्री रहमान मलिक समेत 12 संघीय और प्रांतीय सांसदों को अयोग्य करार दे दिया। मुख्य न्यायाधीश इफ्तिखार चौधरी की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने महमूद अख्तर नकवी नामक व्यक्ति द्वारा दाखिल याचिका की सुनवाई के बाद यह आदेश जारी किया। नकवी ने अदालत से दोहरी नागरिकता रखने वाले सभी सांसदों को अयोग्य करार दिए जाने की अपील की थी। हालांकि मई 2012 तक ब्रिटेन की नागरिकता रखने वाले मलिक के मामले में अयोग्यता उनकी 2008 में तथा इस वर्ष जून में संसद के उच्च सदन सीनेट की सदस्यता से संबंधित है।
ब्रिटिश नागरिकता को छोड़ने के अपने दावे के संबंध में सबूत उपलब्ध नहीं कराने के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने जून में मलिक की सदस्यता को निलंबित कर दिया था। उसके बाद मलिक को सांसद के तौर पर इस्तीफा देना पड़ा था। जुलाई में उन्होंने सीनेट के लिए उपचुनाव लड़ा और वह उच्च सदन के लिए पुन: चुनाव जीतने में सफल रहे। अदालत ने इस बात पर भी गौर किया कि मलिक ने वर्ष 2008 के सीनेट चुनाव के लिए गलत हलफनामा दाखिल किया था जो चुनाव कानूनों का उल्लंघन है। शीर्ष अदालत ने कहा कि वर्ष 2008 में हुए सीनेट के चुनाव के लिए मलिक द्वारा झूठा हलफनामा दाखिल किए जाने के मद्देनजर उन्हें सही, ईमानदार और वफादार नहीं कहा जा सकता।
फैसला सुनाते हुए पीठ ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 63-1सी, के तहत कोई भी सांसद दोहरी नागरिकता नहीं रख सकता। जिन अन्य सांसदों को अयोग्य ठहराया गया है उनमें फराहनाज इस्पानी, जाहिद इकबाल, फरहाद मुहम्मद खान तथा जमील मलिक (सभी संसद सदस्य) मोहम्मद इखलाक, अशरफ चौहान, चौधरी वसीम कादिर, आमना बत्तर और नदीम खादिम (सभी पंजाब विधानसभा के सदस्य) तथा अहमद अली शाह नादिया और गबूल सिंध (सिंध विधानसभा) के सदस्य शामिल हैं।
सीनेट सदस्यता पर सवाल
इस फैसले के संबंध में पाकिस्तान के विधि विशेषज्ञों का कहना है कि सीनेट की उनकी मौजूदा सदस्यता का फैसला सीनेट के अध्यक्ष की और निर्वाचन आयोग द्वारा सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आधार पर उनके खिलाफ की जाने वाली कार्रवाई पर निर्भर करेगा।