पाकिस्तान ने समझौता एक्सप्रेस विस्फोट मामले में आरोपियों के बरी किए जाने विरोध दर्ज कराया है। पाकिस्तान के कार्यवाहक विदेश सचिव ने भारतीय उच्चायुक्त अजय बिसारिया को बुधवार को तलब किया और इस पर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान मामले की धीमी सुनवाई और इस केस की प्रगति पर हमेशा चिंता जताता रहा है। ट्रेन में हुए विस्फोट में निर्दोष लोग मारे गए थे।
पंचकूला की विशेष एनआईए कोर्ट ने समझौता एक्सप्रेस विस्फोट केस में 12 साल बाद बुधवार को असीमानंद समेत चारों आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। असीमानंद के अलावा लोकेश शर्मा, कमल चौहान और राजेंद्र चौधरी भी मामले में बरी हो गए हैं। दिल्ली से लाहौर जा रही समझौता एक्सप्रेस ट्रेन में 18 फरवरी, 2007 को हरियाणा के पानीपत के दो बम धमाके हुए थे, जिनमें 16 बच्चों समेत 68 लोग मारे गए थे। मरने वालों में ज्यादातर पाकिस्तानी नागरिक थे।
एनआईए कोर्ट ने बुधवार को मामले की सुनवाई करते हुए वकील मोमिन मलिक की ओर से सीआरपीसी की धारा 311 के तहत गवाही के लिए लगाई गई याचिका को भी खारिज कर दिया। केस में 11 मार्च को ही फैसला आने के कयास लगाए जा रहे थे, लेकिन अंतिम क्षण में नया मोड़ आ गया था। पाकिस्तान की महिला वकील रहिला के मेल को आधार बनाते हुए वकील मोमिन मलिक ने याचिका लगाई थी कि वह इस केस में कुछ प्रत्यक्षदर्शियों की गवाही करवाना चाहती हैं क्योंकि इस हादसे में उनके पिता की भी मौत हुई थी। लेकिन कोर्ट ने याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि 12 साल तक ये लोग कहां थे। फैसले के वक्त लगाई गई याचिका मायने नहीं रखती है।