पाकिस्तान में सेक्स शब्द एक किस्म की सामाजिक वर्जना है। आम तौर पर इसे पाप, अपराधबोध और शर्मिंदगी से जोड़ कर देखा जाता है।
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लेकिन एक टेलीविज़न चैनल यौन संबंधों पर आधारित अपने साप्ताहिक फ़ोन-इन शो को प्रसारित कर इस वर्जना को तोड़ने का काम कर रहा है।
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एक ऐसे देश में जहां आम जनजीवन में धार्मिक निगरानी का भय छाया रहता है, वहां अपनी यौनिकता के बारे में बात करना बहुत साहस की मांग करता है।
फिर भी अब यह लाइव टीवी पर घटित हो रहा है।
'क्लीनिक ऑनलाइन' नामक इस शो को एचटीवी (हेल्थ टीवी) पर प्रसारित किया जा रहा है। एचटीवी मुख्य रूप से रोज़मर्रा ज़िंदगी में स्वास्थ्य और जीवनशैली पर केंद्रित चैनल है।
यह लोकप्रिय सिद्ध हो रहा है। इस शो में पूरे पाकिस्तान से दर्जनों फ़ोन आते हैं, जिसमें सवाल करने वाले पुरुष और महिलाएं दोनों ही होते हैं।
अजीबोग़रीब सवाल
इस शो में यौन रोगों से लेकर बांझपन, यौन शक्ति, आकार और संतुष्टि तक के मुद्दों को उठाया जाता है।
एक गृहणी की शिकायत थी,"अब वो मेरे साथ नहीं सोते। मैंने बहुत पूछा, लेकिन वो इस पर बात नहीं करना चाहते, मैं क्या करूं?"
फ़ोन करने वाले एक अन्य व्यक्ति ने जानना चाहा, "मेरे शादीशुदा दोस्तों ने बताया कि शादी के कुछ महीनों बाद पुरुषों की यौन शक्ति क्षीण हो जाती है। क्या यही सही है?"
फ़ोन करने वालों की आवाज़ कुछ शर्मिंदगी और हिचकिचाहट से भरी होती है। आम तौर पर वे उर्दू में सेक्स से संबंधित सांस्कृतिक रूप से स्वीकार्य शब्दावली को लेकर असमंजस में होते हैं।
अधिकांश लोग इस समस्या से जूझते हैं और अपनी समस्या को स्पष्ट करने के लिए इशारे का इस्तेमाल करते हैं।
एक महिला कॉलर ने पूछा, "मैं उस आदत की शिकार हो गई हूं, मुझे लगता है कि इसकी वजह से मेरा वज़न बढ़ रहा है। मैं इसे कैसे बंद कर सकती हूं?"
इस शो को होस्ट करने वाले डॉ। नदीम सिद्दिक़ी असल समस्या को समझने के लिए आम तौर पर कई सवाल करते हैं।
सलाह पर सवाल
इस मामले में डॉ. सिद्दिक़ी ने जब सवाल को और स्पष्ट करने को कहा तो महिला ने कहा, "मुझे सेक्स की आदत पड़ गई है, उंगली से। मैं इसे बंद करना चाहती हूं। क्या इसके लिए कोई दवा है?"
हालांकि अधिकांश समय तो डॉ। सिद्दिक़ी अपने कॉलर को तर्कसंगत सलाह देते हैं लेकिन ऐसे कुछ मामलों में वो लड़खड़ा जाते हैं।
एक बेचैन भरी चुप्पी के बाद उन्होंने सलाह दी, "आपको दिन में पांच बार नमाज़ पढ़नी चाहिए, खुद को ग़लत चीजें देखने से रोकना चाहिए और धार्मिक किताबें पढ़नी चाहिए। आप ठीक हो जाएंगी।"
इस विवादास्पद सुझाव के बारे में मैंने डॉक्टर से पूछा तो उन्होंने कहा, "मैं ऐसा कुछ भी करते हुए नहीं दिख सकता जो इस्लाम के ख़िलाफ़ है, नहीं तो इससे समस्या पैदा हो सकती है।"
कराची के ज़ियाद्दुनी मेडिकल हॉस्पीटल में डॉक्टर जावेद उस्मान कहते हैं, "पाकिस्तान में अधिकांश चिकित्सक यौन स्वास्थ्य समस्याओं से निपटने में अक्षम हैं।"
उनका कहना है, "हमारा मेडिकल पाठ्यक्रम असल में इस समस्या पर कुछ नहीं बोलता। इसलिए चिकित्सक अपने सांस्कृतिक और धार्मिक विश्वासों के आधार पर निर्णय देते हैं, न कि चिकित्सकीय ज्ञान के अनुसार।"
यदि अपनी खुशी की ही बात लें। अधिकांश संकीर्ण मानसिकता वाले मुस्लिमों को लगता है कि इस्लाम में हस्तमैथुन और मुखमैथुन वर्जित है, लेकिन मेडिकल शोध बताता है कि ये कहीं से भी ग़लत या असुरक्षित नही है।
इसमें कोई ताज्जुब नहीं है कि यौन स्वास्थ्य को लेकर संकीर्ण समाज में बहुत ग़लत धारणाएं हैं।
व्यापक पैमाने पर मिथक और ग़लत धारणाएं हैं, यहां तक कि चिकित्सक भी इससे अछूते नहीं।
लेकिन कुछ सामाजिक कार्यकर्ता लोगों में जागरूकता फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।
एक शिक्षा एवं स्वास्थ्य अभियान से जुड़े डॉ। सिकंदर सोहनी पिछले दिनों उत्तरी कराची में एक स्कूल में शिक्षकों और अभिभावकों के साथ बातचीत की।
इस बैठक में आने वाले लोगों में बुरके से ढकी महिलाएं भी थीं।