पाकिस्तान के साथ मिलकर चीन के सिंधु नदी पर बांध बनाने की पेशकश के बाद भारत ने इस मुद्दे पर गहरी आपत्ति जताई थी। इसके बाद भी पाकिस्तान ने भारत को दरकिनार करते हुए दावा किया है कि चीन सिंधु नदी पर बांध बनाएगा। मामले में पाकिस्तान के सरकारी रेडियो की ओर से दावा किया गया कि यह चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कोरिडोर (सीपीईसी) का हिस्सा है।
इस डैम परियोजना से पाकिस्तान को बिजली उत्पादन में मिलने वाले लाभ के बारे में सोमवार को से होने वाले के बारे में नेशनल असेंबली की एक समिति को बताया गया। मामले में महीने की शुरुआत में पाकिस्तान के प्लानिंग मंत्री अहसान इकबाल ने एक साक्षात्कार में रॉयटर्स को बताया था कि पाकिस्तान को उम्मीद है कि चीन परियोजना को आर्थिक निधि देगा। यह बांध एक ऐसी परियोजना है जिसे बनाने में योगदान देने से विश्व बैंक और एशियाई विकास बैंक (एडीबी) दोनों ने इनकार कर दिया क्योंकि भारत का दावा है कि यह क्षेत्र कश्मीर का एक हिस्सा है। उन्होंने आगे कहा था कि हालांकि अमेरिका ने भी कुछ साल पहले इस परियोजना का समर्थन करने के बारे में शोर कर रहा था पर भारत ने इसे नहीं दिखाया है।
उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट अगले साल जुलाई में शुरू हो सकता है और इस मेगा डैम के पूरा होने में 10 साल लगेंगे। उन्होंने बताया कि दियामेर-बाशा डैम प्रोजेक्ट पर पाकिस्तान और चीन के बीच दिसंबर में ही सहमति बन गई थी। अगर यह प्रोजेक्ट पूरा होता है तो पाकिस्तान को करीब 4500 मेगावाट बिजली मिलेगी।