पाकिस्तान सरकार ने मुख्य अभियोजक को हटाने के फैसले की कोई वजह नहीं बताई है। गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, यह एक नियमित मामला लगता है। मुझे वजह को जानने के लिए किसी सही व्यक्ति से पूछना पड़ेगा।
10 साल में आगे नहीं बढ़ी सुनवाई
मुंबई हमले का मुकदमा 10वें साल में प्रवेश कर गया है । पाक में अभी तक इसके किसी भी संदिग्ध को दंडित नहीं किया गया है। साफ है, यह मुकदमा कभी भी पाकिस्तान की प्राथमिकताओं में नहीं था।
वह इसे ठंडे बस्ते में डालना चाहता है। जबसे आतंकवाद रोधी अदालत ने अभियोजन पक्ष के सभी 70 गवाहों के बयानों को दर्ज किया, तब से मुश्किल से इस मामले की साप्ताहिक सुनवाई हुई। अभियोजन पक्ष के अनुसार, भारत के 24 गवाहों को बयान दर्ज कराने के लिए पाकिस्तान न भेजने तक यह मामला आगे नहीं बढ़ेगा।
भारत ने पाक से कहा है कि उसने 7 आरोपियों के खिलाफ सबूत मुहैया कराए हैं। इनके आधार पर, पाक को मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद के खिलाफ मुकदमा चलाना चाहिए। इसके बाद भी पाकिस्तानी अधिकारी इस 9 साल पुराने मामले के फैसले के लिए भारतीय गवाहों को भेजने की जिद पर अड़े हैं।
आजाद घूम रहा लखवी
मुंबई हमला मामले में लश्कर-ए-ताइबा के 7 आतंकियों जकीउर रहमान लखवी, अब्दुल वाजिद, मजहर इकबाल, हमद अमीन सादिक, शाहिद जमील रियाज, जमील अहमद और यूनुस अंजुम के खिलाफ 2009 से ही हत्या के लिए उकसाने, हत्या की कोशिश, मुंबई हमले की साजिश रचने और उसे अंजाम देने का मुकदमा चल रहा है।
लश्कर सरगना लखवी को छोड़कर बाकी सभी छह आतंकी रावलपिंडी की अदियाला जेल में बंद हैं। लखवी को 3 साल पहले जमानत मिल गई थी। वह तभी से अज्ञात जगह पर रह रहा है। ऐसी खबरें हैं कि गत वर्ष नवंबर में लखवी लश्कर के मुखौटा संगठन जमात-उद-दावा के मुख्यालय पहुंचा था। यहां उसने सईद को 10 महीने की नजरबंदी से रिहा होने की बदाई दी थी।