हाफिज सईद के समर्थन वाली अल्लाह-ओ-अकबर तहरीक (एएटी) ने देश भर में 13 महिलाओं समेत 265 उम्मीदवार उतारे थे। हाफिज वलीद के अलावा सईद का बेटा तल्हा सईद एएटी के प्रमुख उम्मीदवारों में था जिसने सरगोधा से नेशनल असेम्बली के लिए चुनाव लड़ा था। पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली।
द डॉन ने खबर दी है कि धार्मिक रूप से प्रेरित समूहों को खैबर पख्तूनख्वा में अच्छी प्रतिक्रिया मिली और सामूहिक रूप से उन्हें 18.84 फीसदी वोट मिले वहीं बलूचिस्तान में उन्हें 16.78 फीसदी वोट मिले।
इसने बताया कि हाल में पुनर्गठित मुत्ताहिदा मजलिस ए अमाल (एमएमए) को नेशनल असेम्बली में 12 सीटें हासिल हुईं और उसे 25 लाख वोट मिले। यह विभिन्न धार्मिक दलों का गठबंधन है। इसी तरह जमीयत उलेमा ए इस्लाम नजरयाती पाकिस्तान को महज 34170 वोट मिले जबकि 2013 में इसे एक लाख तीन हजार 98 वोट मिले थे।
चुनाव पर प्रभाव नहीं डालने वाले अन्य धार्मिक दलों में जमीयत उलेमा ए पाकिस्तान (नूरानी) भी शामिल है जिसे महज 22 हजार 918 वोट मिले जबकि 2013 में इसे 67 हजार 966 वोट मिले थे।
सुन्नी इत्तेहाद काउंसिल की लोकप्रियता में भी काफी गिरावट आई क्योंकि इसे केवल 5939 वोट मिले जबकि 2013 में इसे 37 हजार 732 वोट मिले थे। नवगठित तहरीक ए लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) पांचवें बड़े दल के रूप में उभरा जिसे नेशनल असेम्बली में 22 लाख 34 हजार 138 वोट मिले। गौरतलब है कि 25 जुलाई को हुए आम चुनावों में इमरान खान की पार्टी नेशनल असेम्बली में 116 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है।