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जाधव मामला: ICJ के झटके के बाद बचाव की तैयारी में जुटा पाक

Sun, 14 May 2017 09:29 AM IST
एजेंसी/ इस्लामाबाद
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कुलभूषण जाधव (फाइल फोटो)
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भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान में सुनाई गई फांसी की सजा पर अंतरराष्ट्रीय अदालत (आईसीजे) की रोक से लगे झटके के बाद इस्लामाबाद में सरगर्मियां तेज हैं। पाक 15 मई को आईसीजे में होने वाली सुनवाई के लिए अपने बचाव की रणनीति तैयार करने में जुटा है।
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पाक के अटार्नी जनरल अश्तर औसाफ विदेश विभाग और कानूनी विभाग के अधिकारियों के साथ दो दिन से लंबी बैठकें कर रहे हैं। पाक सैन्य अदालत ने कथित जासूसी के आरोप में जाधव को फांसी की सजा सुनाई है। 

पाकिस्तानी अखबार डॉन ने अटॉर्नी जनरल अश्तर औसाफ के हवाले से शनिवार को बताया, ‘हमने अपनी सिफारिशें प्रधानमंत्री कार्यालय और विदेश कार्यालय को भेज दी हैं।’ इन सिफारिशों में उस रणनीति को रेखांकित किया गया है जिसके अनुसार हेग स्थित आईसीजे में पाक अपने मामले को रख सकता है। दो दिन तक लंबी बैठकें करने वाले औसाफ का कहना है कि सभी कदमों और विकल्पों को गोपनीय रखना आवश्यक है, जिससे कि दूसरे पक्ष को हमारी रणनीति का पता न लग सके।
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अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठा सकता है पाक

- फोटो : self
औसाफ द्वारा आईसीजे में पाक का प्रतिनिधित्व किए जाने की उम्मीद है। हालांकि, उन्होंने विदेश से किसी की सेवा लिए जाने की संभावना से भी इनकार नहीं किया है। उन्होंने माना कि समय कम है क्योंकि सुनवाई 15 मई से शुरू होगी। लेकिन पाकिस्तान की ओर से मजबूत तरीके से जवाब दिया जाएगा। गत वर्ष तीन मार्च को गिरफ्तार किए गए जाधव को ‘जासूसी और विध्वंसक गतिविधियों’ के आरोपों में पाकिस्तानी सैन्य अदालत द्वारा मौत की सजा सुनाई गई थी। 

भारत ने यह तो स्वीकार किया है कि जाधव ने पूर्व नौसेना के लिए काम किया है लेकिन उनके अब सरकार से जुड़े होने के आरोपों को नकारा है। भारत का कहना है कि जाधव का ईरान से अपहरण किया गया। भारत ने जाधव को सजा सुनाए जाने के फैसले को पलटने के लिए प्रक्रिया शुरू करने की उनकी मां की अपील भी पाकिस्तान को सौंपी है।

अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठा सकता है पाक
वहीं, अंतरराष्ट्रीय कानून के एक जानकार के मुताबिक, पाकिस्तान 1999 में भारत द्वारा अपने एक विमान को मार गिराए जाने का हवाला देकर आईसीजे के सामने उसके अधिकार क्षेत्र का मुद्दा उठा सकता है। विमान को मार गिराने के मामले में भारत ने इस आधार पर अंतरराष्ट्रीय अदालत के अधिकार क्षेत्र को मानने से इनकार कर दिया था कि वह राष्ट्रमंडल देशों के बीच विवाद के मामलों में सुनवाई नहीं कर सकती।
 
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