पाकिस्तान ने सिख श्रद्धालुओं के लिए ऐतिहासिक करतापुर कॉरिडोर के शिलान्यास के बाद करतारपुर सीमा पर एक आव्रजन केंद्र स्थापित किया है। सिख समुदाय की लंबे समय से अटकी मांग को पूरा करते हुए यह गलियारा पाकिस्तान के करतारपुर स्थित दरबार साहिब को भारत के गुरदासपुर जिले के डेरा बाबा नानक गुरुद्वारे से जोड़ेगा। सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव ने अपनी जिंदगी के आखिरी साल करतारपुर में ही बिताए थे।
संघीय जांच एजेंसी (एफआईए) के उपनिदेशक (पंजाब) मुफखर अदील ने कहा चूंकि सीमा पार कराने वाला स्थान, आतंकवादियों, मानव तस्करों और मादक पदार्थ विक्रेताओं के लिए एक आसान निशाना बन सकता है इसलिए सीमा के दोनों तरफ स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए एक मजबूत प्रणाली की जरूरत है। अदील ने बताया कि एफआईए ने करतापुर गलियारा खोले जाने को लेकर नरोवाल में करतारपुर सीमा पर एक आव्रजन कार्यालय स्थापित किया है।
उन्होंने बताया कि एफआईए अधिकारी बोर्डिंग अधिकारियों की भूमिका निभाएंगे, सिख श्रद्धालुओं के दस्तावेजों की जांच करेंगे और बायोमेट्रिक तकनीक के जरिए उनकी पहचान करेंगे। वीजा धारक सिख श्रद्धालुओं को शहर में प्रवेश की अनुमति दी जाएगी जबकि परमिट धारकों को केवल गुरुद्वारा दरबार साहिब तक जाने दिया जाएगा। इस गलियारे के छह महीने के भीतर पूरा होने की उम्मीद है।